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वार्ता विफल, जारी रहेगी हड़ताल.


सीकर. भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े निजी अस्पताल संचालकों के योजना से बहिष्कार के निर्णय ने चिकित्सा विभाग की नींद उड़ा दी है। अस्पताल संचालकों के कार्य बहिष्कार के कारण शुक्रवार को चिकित्सा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. यदुराज नाथावत सीकर आए। उन्होंने भामाशाह प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन सीकर के प्रतिनिधि मंडल से वार्ता की। वार्ता में विभाग का तर्क रहा कि बीमा कम्पनी के पास जो पैसा रुका हुआ वो खातों में ट्रांसफर हो गया है तो हड़ताल क्यों की जा रही है। वहीं निजी अस्पताल संचालकों ने कहा कि रुका पैसा एसोसिएशन की मुख्य मांग नही है। एसोसिएशन चाहती है कि बीमा कम्पनी की मनमानी बंद हो। इस दौरान कोई सक्षम अधिकारी नहीं होने वार्ता विफल रही और एसोसिएशन ने मांगे पूरी नहीं होने तक कार्य का बहिष्कार रखने का निर्णय की घोषणा की। गौरतलब है कि सात अगस्त की मध्य रात्रि से निजी अस्पताल संचालकों ने योजना का पूरी तरह बहिष्कार कर रखा है।

जयपुर से आए अस्पताल के प्रतिनिधि
भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े निजी अस्पताल संचालकों की मांगों के समर्थन में प्रदेश के 13 जिलों में योजना का बहिष्कार किया जा रहा है। भामाशाह प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन के बैनर तले हुई पत्रकार वार्ता में डॉ. बीएल रणवा ने बताया कि जयपुर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज, एपेक्स अस्पताल और रमनजी अस्पताल के प्रतिनिधियों ने सीकर आकर नैतिक समर्थन दे दिया है और एक-दो दिन में जयपुर में वार्ता कर योजना का बष्हिकार किया जाएगा। इस दौरान सीएमएचओ डॉ. अजय चौधरी, अतिरिक्त सीएमएचओ डॉ. अशोक महरिया, भामाशाह प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. बीएल रणवा, रामधन बडकेशिया, नटवर बिंदल, मनीष त्यागी आदि मौजूद रहे।

बढ़ रहा है दवाब
सरकार की महत्वाकांक्षी और सबसे बड़ी योजना के बहिष्कार के कारण सरकार पर दवाब बढ रहा है। पूर्व में हो चुके चिकित्सकों के आंदोलन के कारण बैकफुट पर आए विभागीय अधिकारी भी दबे मुंह से अधिकारी भी मान रहे हैं कि बीमा कम्पनी ने जानबूझकर अस्पतालों के क्लेम रोक रखे हैं। अस्पताल संचालकों का आरोप है कि बीमा कम्पनी फाल्ट में है तभी तो उसने आनन-फानन में तीन करोड रुपए अस्पतालों के खातों में डलवाए हैं।

बहिष्कार नहीं करे इसलिए जमा कराए रुपए
भामाशाह योजना को लेकर न्यू इण्डिया इन्श्योरेंस बीमा कंपनी के अधिकारियों के तानाशाही रवैए व हठधर्मिता के कारण शेखावाटी से सुलगी चिगांरी राज्य भर में फैल गई है। एक अगस्त से शुरू हुए आन्दोलन को प्रदेश के 700 से अधिक अस्पतालों का समर्थन मिलने का दावा किया जा रहा है। अस्पतालों के बहिष्कार के बाद जयपुर में हुई बैठक में सरकार के नुमाइंदे लाचार व बेबस नजर आए। एसोसिएशन के संयोजक डा. महेन्द्र बुड़ानिया ने बताया कि सीकर के निजी अस्पतालों की ओर योजना का बहिष्कार को रोकने के लिए ही सरकार की ओर बकाया राशि का भुगतान किया गया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि सरकार ने निजी अस्पतालों की मुख्य मांगों का दरकिनार कर चोट पर मरहम लगाने की बजाए रिश्वत देने का काम किया है।



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