कोटा. फसल बीमा योजना किसानों के लिए छलावा साबित हो रही है। बीमा कम्पनियां किसानों से हर साल प्रीमियम की मोटी राशि वसूल करती है, लेकिन क्लेम देने में कंजूसी बरती जाती है। पिछले दो साल में किसानों से बीमा कम्पनियों ने फसलों के बीमा करने की ऐवज में 107 करोड़ की राशि प्रीमियम के रूप में वसूली, जबकि इस अवधि में 23.7 करोड़ का ही क्लेम दिया है।राज्य सरकार द्वारा अधिकृत बीमा कम्पनियों द्वारा हर साल ऋणी व गैर ऋणी किसानों से प्रीमियम के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है। राज्य व केंद्र सरकार भी कुछ अंशदान बीमा कम्पनियों को जमा कराती है। जब बीमा कम्पनियों द्वारा फसल खराबे का किसानों को क्लेम देने का समय आता है तो कई कानूनी अड़चनें खड़ी कर दी जाती हैं। बीमित किसानों में से गिनती के किसानों को नाममात्र का क्लेम दिया जाता है।
यह है हकीकत
कृषि विभाग के अनुसार, प्रदेश में 2015 में हुई ओलावृष्टि के बाद केंद्र सरकार ने फसली बीमा योजना का सरलीकरण किया। वर्ष 2016 व 2017 में कोटा जिले में रबी-खरीफ की फसल का बीमा करने के लिए राज्य सरकार ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कम्पनी को अधिकृत किया। बीमा कम्पनी ने 2 साल में जिले के 3 लाख 2226 किसानों से राज्य व केंद्र सरकार द्वारा देय अनुदान सहित 107.58 करोड़ का प्रीमियम वसूला। जबकि इस अवधि में जिले के 35 हजार 410 किसानों को महज 23.70 करोड़ का क्लेम वितरित किया।
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नहीं देते किसानों का रिकॉर्ड
बीमा कम्पनी द्वारा हर साल जिले के ऋणी किसानों को बीमा किया जाता है। वित्तीय संस्था द्वारा प्रीमियम काट कर बीमा कम्पनी को जमा करा दिया जाता है। इसका पूरा रिकार्ड सरकार द्वारा कृषि विभाग को भी उपलब्ध कराने के बीमा कम्पनियों को निर्देश दे रखे हैं। इसके बावजूद भी बीमा कम्पनियों द्वारा कृषि विभाग को बीमित किसानों का डाटा उपलब्ध नहीं कराए जाते। सिर्फ फसली सीजन समाप्त होने के सात-आठ माह बाद बीमित किसान, प्रीमियम, क्लेम स्वीकृत हुए किसान, क्लेम राशि बताई जाती है।
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93 लाख के क्लेम का नहीं मिल रहा हिसाब
बीमा कम्पनी ने वर्ष 2016 के रबी सीजन में कोटा जिले के 75 हजार किसानों की 91 हजार हैक्टेयर की फसल का 350.38 करोड़ का बीमा किया था। इसमें से कम्पनी से केंद्र व राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान सहित किसानों से 23.76 करोड़ का प्रीमियम वसूला। फसल खराबे पर कम्पनी ने मात्र एक हजार किसानों के लिए 1.35 करोड़ का क्लेम स्वीकृत किया। इसमें से भी मात्र 42 लाख रुपए ही किसानों को वितरित किए। अभी भी बीमा कम्पनी के पास 93 लाख रुपए किसानों के हिस्से के रखे हुए है। जो बीमा कम्पनी किसानों को वितरित नहीं कर रही।
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बीमित वर्ष समाप्ति के सात-आठ माह बाद जयपुर मुख्यालय से जानकारी मिलती है। बीमा कम्पनी फील्ड में काम तो करती है, लेकिन हमें किसी प्रकार के दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराती। मॉनिटरिंग भी जयपुर स्तर पर ही होती है। बीमा कम्पनी, बीमित किसान, जमा प्रीमियम, क्लेम की पूरी जानकारी वहीं से मिल सकती है।
- केसी मीणा, उपनिदेशक, कृषि विस्तार, कोटा





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