राणावास एसं . राणावास के समीप काजलवास में स्थित अरावली की पहाडिय़ों में चारों ओर फैले इमारती पत्थर, मकानों की नजर आती दीवारें व चार दीवारी, ईटों व गारे मिट्टी के अवशेष चारों ओर बिखरे पड़े हैं। ग्रामीणों की मानें तो यहां पर किसी पुरानी बस्ती के होने का अनुमान है। ग्रामीण यहां पर पाटन गांव के बसावट को लेकर हवाला देते हैं। वहीं इस गांव को लेकर यहां कई तरह कि कहानियां भी प्रचलित हैं।
यहां काजलवास में जंगल में पुरानी सभ्यता जैसे अवशेष बिखरे पड़े हैं। स्थानीय लोग इसे हजारों साल पुरानी सभ्यता से जोड़ कर देख रहे हैं। कई लोग इसको पाटन गांव का नाम देते हैं। मान्यता के अनुसार पाटन शहर अरावली की पहाडिय़ों में कई किलोमीटर में फैला हुआ है। काजलवास मंदिर अरावली की पहाडिय़ों के बीच ही स्थित है। मंदिर से कुछ ही दूरी पर एक पत्थरों का नगर नजर आता है। यहां पर पत्थरों की दीवारें, प्रत्येक घर की चार दीवारी, बीच में समतल जमीन, बड़ी-बड़ी ईंटें, कई घरों में छोटे-छोटे पत्थरों से बनाए गए कुण्ड भी दिखाई देते हैं। यहां पर प्रत्येक घर की मुख्य परिधि पत्थरों से निर्मित चार फीट के करीब है। जबकि पत्थरों को आपस में जोडऩे के लिए माटी का प्रयोग किया गया है। पत्थरों के बसाया गए नगर असम की खेती की तरह क्रमबद्ध है। बीच में निकलने के लिए एक गली भी यहां प्रतीत होती है। प्रत्येक खण्ड पर एक के पास एक घर बनाए हुए हैं। तीन पहाड़ों के बीच स्थित यह जगह के दोनों तरफ नदी होने के संकेत भी हैं। इस पर पत्थरों के पुल भी बनाए गए हैं। यहां पर मौजूद ईंटों की लम्बाई और चौडाई सामान्य ईंटों से काफी ज्यादा है। जिनका वजन अनुमानित ६ से ७ किलोग्राम का है।
काजलवास व अरावली के पहाडों में पाटन नगर बसे होने के जानकारी है। कई बार स्वयं देखकर भी आया हूं। इस शहर के बारे में कई दंत कथाएं भी हैं, जो सिरियारी व काजलवास धाम से जुड़ी हुई हैं।
मांगीलाल चौधरी, कपड़ा व्यवसायी, राणावास
पाटन नगर के बारे में कई बार परिवार के बड़े बुर्जगों से सुना है। इस शहर से जुड़ी कथाएं काजलवास धाम से संबधित हैं। जो कि सात हजार वर्ष पुरानी है। स्वयं ने काजलवास धाम के पीछे स्थित प्राचीन सभ्यता को देखा है। जनप्रतिनिधियों को भी इस बारे में जानकारी है।
भगतसिंह मेवाड़ा, पंचायत समिति सदस्य, सिरियारी





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