सिरोही से त्रिलोक शर्मा की रिपोर्ट
सिरोही. सरकारी जमीन पर ग्वार की खेती। वह भी बिना इजाजत। जी हां, यह सर्किट हाउस से सटी बेशकीमती जमीन का मामला है। यहां बाकायदा तहसीलदार की ओर से सरकारी फरमान लिखा आम सूचना का बोर्ड तक लगा हुआ है। इस पर साफ लिखा है कि इस पर कब्जा करना कानूनी अपराध है लेकिन अतिक्रमियों का दुस्साहस देखिए। न सिर्फ इस जमीन पर साफ-सफाई करवाई बल्कि ग्वार की खेती तक कर डाली। बारिश के बाद अब इस जमीन पर फसली पौधे तक उग आए हैं। तहसीलदार ने चंद माह पहले भी अतिक्रमियों को बेदखल कर उनके कब्जे से गेहूं पकड़े थे। प्रशासन की अनदेखी और मुख्यमंत्री के दौरे में व्यस्तता का फायदा उठाकर अतिक्रमणकारी फिर एकबार फसल लेने को तैयार हैं। ग्वार के पौधे जमीन से करीब आधा फुट निकल आए हैं। इस व्यस्त मार्ग से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का रोज आवागमन रहता है। मौके पर 9.3000 हैक्टेयर भूमि बिलानाम होना दर्शाया गया है।
हो सकती है जेल !
भू-राजस्व अधिनियम की धारा-91 के मुताबिक यदि पटवारी की मौका रिपोर्ट के आधार पर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण पाया जाता है तो पहली बार में नियमानुसार बेदखली की कार्रवाई की जाती है लेकिन इसके बाद लगातार अतिक्रमण करने की पुष्टि होती है तो तीन माह की साधारण कैद की सजा हो सकती है। तहसीलदार और नायब तहसीलदार को धारा 91 के तहत ये अधिकार हैं।
पहले भी कार्रवाई
तकरीबन पांच महीने पहले 19 मार्च को इस जमीन से अतिक्रमियों को बेदखल किया था और गेहूं की फसल काटकर ले जाने पर
उनके कब्जे से गेहूं के 43 कट्टे जब्त किए थे। यह जमीन 54 बीघा 9 बिस्वा है। तत्कालीन तहसीलदार अनोपसिंह, नायब तहसीलदार शंकरलाल मीणा, आरआई रतनाराम, कोतवाली थाना प्रभारी आनंद कुमार ने कार्रवाई की थी।
करेंगे कार्रवाई
&सरकारी जमीन पर खेती के मामले का पता कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- रणछोड़लाल, तहसीलदार, सिरोही





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