डब्ल्यूएचओ की सिफारिश के अनुसार भी नवजात शिशु के लिए मां का पीला गाढ़ा दूध है जरुरी
जयपुर
हर बच्चे को मां का दूध शुरुआत के छह महीने तक मिलें। यही जागरुकता फैलाने के लिए पूरे विश्व में 1 अगस्त से 7 अगस्त तक 'विश्व स्तनपान दिवस' मनाया जा रहा है। गांव-ढाणियों में और खासतौर पर शहरी क्षेत्रों की पढ़ी लिखी और वर्किंग वुमन को दूध पिलाने को लेकर राज्य सरकार की ओर से कैंपेन भी चलाया जा रहा है। इसका मकसद है कि बच्चे को पहले दिन से ही पौष्टिक आहार की पूर्ति हो क्योंकि मां के शुरुआती छह महीने के पीले गाढ़े दूध को बेहद पौष्टिक माना गया है। आइए एक नजर डालते हैं आखिर स्तनपान कराना किसी मां के लिए क्यों हैं जरुरी.
डब्ल्यूएचओ की सिफारिश
डब्ल्यूएचओ की सिफारिश के अनुसार नवजात शिशु के लिए पीला गाढ़ा चिपचिपा युक्त मां का दूध कोलेस्ट्रम संपूर्ण आहार होता है.. जिसे बच्चे के जन्म के तुरंत बाद या फिर 1 घंटे के भीतर ही शुरू कर देना चाहिए... सामान्यतया बच्चे को 6 महीने की अवस्था तक स्तनपान कराने की अनुशंसा की जाती है। शिशु को 6 महीने की अवस्था और 2 वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान कराने के साथ-साथ पौष्टिक पूरक आहार भी देना चाहिए।
एक्सपर्ट्स की मानें तो मां के दूध में बच्चे के लिए आवश्यक प्रोटीन, वसा, कैलोरी, लैक्टोज, विटामिन, लोहा, खनिज, पानी और एंजाइम पर्याप्त मात्रा में होते है। मां का दूध पचाने में त्वरित और आसान होता है। यह बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। जो कि भविष्य में उसे कई तरह के संक्रमणों से भी सुरक्षित रखता है। इसके साथ ही यह बच्चे के मस्तिष्क के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्तनपान कराने से स्तन व डिम्बग्रंथि के कैंसर की संभावनाएं कम हो जाती है। यह प्रसव पूर्व खून बहने और एनीमिया की संभावना को भी कम करता है। यह माँ को अपनी पुरानी शारीरिक संरचना पुन: पाने में भी मदद करता हैं। और यदि मां ये सोचकर बच्चे को दूध नहीं पिलाती है कि इससे वह मोटी हो जाएगी तो भी ये गलत है। क्योंकि स्तनपान कराने वाली माताओं में मोटापा नहीं होता।





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