सवाईमाधोपुर.रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में पांच साल पुरानी जिप्सियों को जंगल से रिटायर नहीं किया जाएगा। बल्कि उन्हें ई जिप्सी में बदलकर जंगल में चलाया जाएगा। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वन विभाग पांच साल पूरे कर चुकी जिप्सियों को ई जिप्सियों में बदलने पर विचार कर रहा है। इसके लिए विभाग की ओर से कवायद भी शुरू कर दी गई है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो वन विभाग की ओर से जल्द ही इस संबंध में निविदा भरी जारी की जा सकती है।
उच्च अधिकारियों को भेजा प्रस्ताव
वन अधिकारियों ने पूर्व मेंं इस संबंध में उच्च अधिकारियों को इस संबंध मेंं प्रस्ताव बनाकर भेजा था। इसमें रणथम्भौर में इलक्ट्रिक वाहनों के संचालन की कवायद की गई है। सूत्रोंं के अनुसार विभाग की ओरसे गत दिनों वाहन की ट्रायल भी ली गई है।
विभाग का यह तर्क
पूर्व में विभाग की ओर से रणथम्भौर में प्रदुषण रोकने के लिए पट्रोल डीजल के वाहनों के स्थान पर इलक्ट्रिक वाहनों के संचालन के लिए कवायद की गई थी। लेकिन पूर्व में ट्रायल के दौरान ही उक्त वाहन का दम निकल गया था। ऐसे में अब रणथम्भौर में संचालित जिप्सियों को ही ई जिप्सी में बदलने की कवायद की जा रही है। इस सबंध में विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में संचालित जिप्यिों में अधिक दम है लेकिन वो प्रदुषण करती है ऐसे में प्रदुषण को रोकने के लिए यह कवायद की जा रही है।
पूर्व में पलट गया था कैंटर
वन विभाग 2011 ने भाी वन विभाग ने रणथम्भौर में पट्रोल कैंटर चलाने की कवायद की थी। विभाग की ओर से उस समय कैंटर में एंबेसेडर कार का इंजन लगाया गया था। लेकिन इन कैंटरों का भी जंगल में दम निकल गया था। उस समय जोन छह में बेरदा के पास चढ़ाई पर कैंटर पलट गया था इसके बाद विभाग ने इन कैंटरों के संचालन पर पाबंदी लगा दी थी।
वाहन मालिकों व चालकों में रोष
वन विभाग की ओर से की जा रही कवायद से वाहन चालकों व मालिकोंं में रोष है। इस मामले वाहन चालकों व मालिकों की ओर से विरोध किया जा रहा है और वाहन चालक व मालिक बहिष्कार की चेतावनी दे रहे हैं।
इनका कहना है....
रणथम्भौर मेंं इलक्ट्रिक वाहनों के संचालन की कवायद की जा रही है। इसके लिए प्रस्ताव भेजा गया है। नई इलेक्ट्रिक जिप्सियों का पंजीयन नए सत्र में किया जाएगा।
-अजीत सक्सेना, उपवन संरक्षक(पर्यटन)रणथम्भौर, सवाईमाधोपुर।





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