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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, राज्यसभा चुनाव में नहीं होगा NOTA का इस्तेमाल

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने मंगवार को राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ अर्थात् (नोटा) के विकल्प की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि NOTA का विकल्प सिर्फ प्रत्यक्ष चुनावों के लिए दिया गया है न कि राज्यसभा जैसे चुनावों के लिए।

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सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग की अधिसूचना भी रद्द
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने शैलेष मनुभाई परमार की याचिका पर राज्यसभा चुनाव के मतपत्रों में नोटा के विकल्प की इजाजत देने वाली भारतीय निर्वाचन आयोग की अधिसूचना भी रद्द कर दी। शैलेष मनुभाई परमार गुजरात कांग्रेस के नेता हैं और ये याचिका उन्होंने 2017 में उस वक्त दायर की थी, अहमद पटेल की उम्मीदवारी पर बीजेपी और कांग्रेस में विवाद हो रहा था।

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आयोग की अधिसूचना को दी थी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने अधिसूचना पर सवालिया निशान खड़ा करते हुए कहा कि नोटा सीधे चुनाव में सामान्य मतदाताओं के इस्तेमाल के लिए बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने मतपत्रों में नोटा के विकल्प की इजाजत देने वाली आयोग की अधिसूचना को चुनौती दी थी।

कांग्रेस ने भी किया था नोटा का विरोध

न्यायालय ने गत 30 जुलाई को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुजरात कांग्रेस के नेता का कहना था कि राज्यसभा चुनाव में यदि नोटा के प्रावधान को मंजूरी दी जाती है तो इससे ‘खरीद-फरोख्त और भ्रष्टाचार’ को बढ़ावा मिलेगा। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भी राज्यसभा चुनाव के लिए नोटा का विरोध किया था।



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