मो. इलियास/उदयपुर. फलासिया थानाक्षेत्र में 20 दिन पूर्व एक महिला व नाबालिग से बलात्कार के आरोपियों को ग्रामीणों द्वारा थानापुलिस के सुपुर्द करने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं दिखाकर फरार में सहयोग के मामले में आईजी ने प्रारंभिक जांच के बाद आदेश जारी कर थानाधिकारी महिपाल सिंह को निलंबित कर दिया। आईजी ने सीओ झाड़ोल को मामले की जांच सौंपते हुए पूरी रिपोर्ट तलब की है। सीओ ने शुक्रवार को गांव पहुंचकर पीडि़ताओं व उसके परिजनों के बयान लिए, जिसमें परिजनों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि कार्रवाई के एवज में उन्होंने पुलिस को पैसे भी दिए थे। आईजी विशाल बसंल का कहना है कि जांच रिपोर्ट के बाद मामले में जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
गत 5 अगस्त को पीडि़ताओं के साथ हुए दुष्कर्म की इस घटना को राजस्थान पत्रिका ने शुक्रवार के अंक में ‘बलात्कार में तोड़बट्टा, अवैध हिरासत से भागे आरोपी’ खबर प्रकाशित कर पुलिस की लापरवाही की पोल खोली थी। घटना के बाद ग्रामीणों ने आरोपियों को पकड़ते हुए धुना था, गांव में रैली निकालने के बाद पुलिस के सुपुर्द किया था। पुलिस ने उसी दिन थाने में बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज की लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं बताई। करीब पांच से छह दिन अवैध हिरासत के दौरान ही आरोपी दिलीप पुत्र खन्नी उर्फ राजू दामा व राकेश पुत्र बाबूलाल दामा पुलिस को गच्चा देकर भाग निकले। पुलिस ने परिजनों को आरोपियों को फलासिया से पानरवा थाने में शिफ्ट करने के दौरान वहां खिडक़ी तोडकऱ भागना बताया बाद में पानरवा चिकित्सालय में उपचार के दौरान ले जाते भागना दिखाया।
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आरोपी की इस फरारी किसी भी उच्चाधिकारियों को नहीं दी और अपने स्तर पर ही तोड़बट्टा कर थाने में बलात्कार के मामले में पंचायती व समझौते का दबाव बनाते रहे। पत्रिका में खबर प्रकाशन के बाद आईजी ने स्वयं माना कि थानाधिकारी ने मामले में घोर लापरवाही बरती। खबर व प्रारंभिक सूचना के आधार पर ही उन्होंने थानाधिकारी को निलंबन के आदेश जारी किए। इधर, घटना उजागर होने के बाद बाल कल्याण समिति ने भी संज्ञान लेते हुए नाबालिग के मामले में एसपी से रिपोर्ट मांगी है।





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