अजमेर
महर्षि दयानंद सरस्वती के प्रवेश द्वार और आसपास के इलाकों में पोस्टर-बैनर लगाने वाले छात्रनेताओं को नियमों की परवाह नहीं है। छात्र नेताओं को 31 जुलाई तक पोस्टर-बैनर हटाने को कहा गया था लेकिन विश्वविद्यालय ने कोई कार्रवाई नहीं की। जिला प्रशासन और नगर निगम ने भी छात्रों के खिलाफ शहर गंदा करने के मामले में मामले दर्ज नहीं किए।
विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव लडऩे के इच्छुक कई भावी छात्र नेताओं ने बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर लगा दिए हैं। विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार, सड़क के पास चाय की थडिय़ां और अन्य इलाकों में पोस्टर-बैनर लगे हुए हैं। इनमें एनएसयूआई, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से चुनाव लडऩे वाले छात्र और अन्य विद्यार्थी शामिल हैं। कई पोस्टर तो छात्रों ने आपसी रंजिश में फाड़ भी दिए हैं।
वरना हम करेंगे कार्रवाई
विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति प्रो. विजय श्रीमाली (अब हुआ निधन) ने छात्रों के पोस्टर-बैनर लगाने और परिसर का क्षेत्र गंदा करने पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने 31 जुलाई तक छात्रों के जुलाई अंत तक पोस्टर बैनर नहीं हटाने पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। लेकिन फिलहाल विश्वविद्यालय ने नियम-कायदे ताक पर रख दिए हैं।
ना कार्रवाई ना सूचना
विश्वविद्यालय ने तय किया था कि अगस्त शुरू होते ही परिसर या इसके आसपास कोई पोस्टर-बैनर लगा मिलने पर संबंधित छात्र या उसके संगठन के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। जिला प्रशासन और नगर निगम को भी शिकायत भेजी जाएगी। इसके अलावा विश्वविद्यालय अभियान भी चलाएगा। पोस्टर-बैनर, दीवारों पर नारों की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया है।
पुलिस और प्रशासन भी खमोश
पुलिस और जिला प्रशासन भी शहर को गंदा होते देख रहे हैं। अब तक नगर निगम और जिला प्रशासन की तरफ से संबंधित छात्रों के खिलाफ कोई मामले दर्ज नहीं किए गए हैं।
नहीं बनी पुलिस चौकी.....
पूर्व छात्रसंघ दीनाराम धौलिया के साथ मारपीट और छात्रों के बीच परस्पर विवादों को देखते हुए परिसर में अस्थाई पुलिस चौकी स्थापित कराई जानी थी। इसके लिए तत्कालीन आई.जी मालिनी अग्रवाल को पत्र भी भेजा था। इसके बावजूद चौकी स्थापित नहीं हुई है।





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