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मिग-27 ने 27 साल बाद दोहराया इतिहास, साल 1991 में एयर कोमोडर कुंभट के साथ हुआ था ये हादसा

गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. शहर से 25 किलोमीटर दूर जालेली गांव में क्रेश हुए मिग-27 लड़ाकू विमान ने ठीक 27 साल बाद इस हादसे को दोहराया है। 4 सितम्बर 1991 को जोधपुर में ही पाबुपुरा के पास मिग-27 जेट ट्रेनर उड़ा रहे तत्कालीन स्क्वाड्रन लीडर जिनेंद्र कुंभट के विमान से गिद्ध टकराया था। ट्रेनर में दो सीटें होती है। जैसे ही पक्षी टकराया, विमान में आग लग गई, लेकिन कुंभट और उनके साथी पायलट सुरक्षित तरीके से ऑटो इजेक्ट होकर जमीन पर आ गिरे। वायुसेना से एयर कोमोडोर पद से सेवानिवृत्त हुए जोधपुर निवासी कुंभट 4 सितम्बर के दिन को अपने दूसरे जन्मदिन के रूप में मनाते हैं। राजस्थान पत्रिका से बातचीत में कुंभट बोले-, ‘आज वे 27 साल के हो गए हैं।’

वह मेरा दूसरा जन्मदिन था
‘मेरा वायुसेना में 16 वां साल था। 4 सितम्बर 1991 को सुबह के 10.30 बजे थे। मैं मिग-27 जेट ट्रेनर पर कॉ पायलट के साथ लड़ाकू विमान उड़ा रहा था। उस समय एयरफोर्स स्टेशन के आसपास पक्षियों की भरमार थी। मेरा प्लेन कुछ नीचे आया और पाबुपरा के पास गिद्ध टकरा गया। गिद्ध टकराते ही जोरदार धमाका हुआ। मैं और साथी पायलट ऑटो इजेक्ट हो गए। प्लेन इतना नीचे था कि पैराशूट खुलकर हम नीचे कैसे गिरे, पता ही नहीं चला। एक दिन पहले बरसात हो रखी थी इसलिए जमीन पर गिरने पर ज्यादा चोट नहीं आई। किस्मत की बात यह थी कि रेसक्यू वाला हेलीकॉप्टर हमारे ऊपर ही उड़ रहा था। वह तीन मिनट में ही जमीन पर उतरा और हमें लेकर उड़ा। हेलीकॉप्टर में बैठने के बाद हमने हमारे मिग-27 को जलते हुए देखा। वह हमारे से 150 गज दूरी पर धूं-धूं कर जल रहा था। प्लेन गांव से 50-60 गज दूरी पर गिरा था, इसलिए जान माल का कोई नुकसान नहीं हुआ। मुझे ज्यादा चोट नहीं लगी और मैं 15 दिन बाद ही रूटीन फ्लाइट पर लौट आया लेकिन उस दिन भगवान ने ही मुझे बचाया क्योंकि जब पैराशूट खुला तो मैं जमीन से 25-30 मीटर ही ऊपर था। मैं इसे अपने दूसरे जन्मदिन के रूप में मनाता हूं।’

- जिनेंद्र कुम्भट, सेवानिवृत्त एयर कोमोडोर, भारतीय वायुसेना


(कुम्भट जोधपुर के रहने वाले हैं। वे जोधपुर में स्टेशन इंचार्ज भी रहे और 2011 में सेवानिवृत्त हुए।)



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