भीलवाड़ा ।
जीएसटी लागू होने के बाद अब सरकारी कार्यालयों को ढाई लाख से अधिक की सामग्री सप्लाई होने पर जीएसटी के टीडीएस के रूप में दो प्रतिशत की दर से कटौती भी करनी होगी। वाणिज्यिक कर विभाग ने निकाय सहित अन्य सरकारी कार्यालयों को दो प्रतिशत टीडीएस जमा कराने के लिए पाबन्द किया है। यह नई व्यवस्था एक अक्टूबर से लागू होगी। जबकि जीएसटी एक जुलाई 2017 को लागू की गई थी। एक अक्टूबर को इस व्यवस्था के लागू होने के बाद ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए भी नियम बदल जाएंगे। अगले महीने कंपनियों को जीएसटी के तहत सप्लायर्स को भुगतान करते समय उससे एक प्रतिशत टीसीएस वसूलना होगा।
विभाग के अनुसार जीएसटी की कर प्रणाली की धारा 51 के तहत केन्द्र और राज्य सरकार के अधीन आने वाले सङी राजकीय विभाग, स्थानीय निकाय और राजकीय एजेन्सियां एवं संस्थाओं से दो प्रतिशत टीडीएस काटने का प्रावधान है। इसके अलावा जीएसटी कॉउसिंल की अनुशंसा परके अनुसूचित व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह की ओर से की गई ढाई लाख रुपए से अधिक का माल सप्लाई करने पर दो प्रतिशत टीडीएस कटेगा। इसमें एक प्रतिशत सीजीएसटी और एक प्रतिशत स्टेट जीएसटी का हिस्सा होगा।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद जहां राज्य सरकार और केन्द्र सरकार को अधिक राजस्व मिलेगा वही सरकारी कार्यालयों में सप्लाई होने वाली सामग्री महंगी हो जाएगी। सरकार ने जीएसटी के नियमों में ही प्रावधआन कर रखा था, पर व्यापारियों को जीएसटी लागी होने की वजह से हो रही परेशानियों को देखते हुए सरकार ने लागू नहीं किया। करीब सवा साल बाद सरकार ने एक अक्टूबर से दो प्रतिशत टीडीएस काटने का फैसला लागू किया है।
उधर माल एवं सेवा कर उत्पाद कानून के तहत टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस)और टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (टीसीएस) के प्रावधान एक अक्टूबर से लागू हो जाएंगे। इसके बाद केंद्रीय जीएसटी के तहत अधिसूचित कंपनियों को 2.5 लाख रुपए से ज्यादा के सामान की बिक्री और सेवा की सप्लाई पर 1 प्रतिशत (टीडीएस) लेना होगा। राज्यों की खातिर भी एक अक्टूबर से टीडीएस के नियम लागू होंगे।
राज्यों को भी राज्य कानूनों के तहत 1 प्रतिशत टीडीएस लगाना होगा। केंद्र सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी हैसरकार ने पहले इसे लागू करने की तारीख 1 जुलाई 2017 से रखी थी। जिसे बढ़ा कर 30 जून 2018 तक कर दिया गया था। बाद में 30 जून की तारीख को भी आगे बढ़ाया गया और 30 सितंबर इसकी तारीख रखी गई। दरअसल इस दौरान कारोबारियों ने बोझ बढऩे की चिंता व्यक्त की थी। इसे देखते हुए सरकार ने इसकी तारीख बढ़ाकर 30 सितंबर कर दिया था। अब 1 अक्टूबर से यह व्यवस्था लागू की जा रही है।





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