प्रमोद सोनी/उदयपुर . टाटा स्टील की कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) टीम की ओर से सेंटर फॉर माइक्रोफाइनेंस, आस्था संस्थान, आजीविका ब्यूरो और टाटा ट्रस्ट के सहयोग से तीसरा क्षेत्रीय संवाद सम्मेलन सोमवार को उदयपुर में शुरू हुआ। इसमें राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के 21 जिलों से 19 जनजातीय समुदायों के 139 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।
टाटा स्टील के चीफ सीएसआर सौरव रॉय ने बताया कि यह सम्मेलन शिक्षा, प्रचलित स्वास्थ्य ङ्क्षचताओं और वन-आधारित आजीविका सहित विभिन्न विषयों पर केंद्रित है। इस माह की शुरुआत में गजपति ओडिशा और मदुरै तमिलनाडु में क्षेत्रीय संवाद हुए थे, जिसमें देश के पूर्वी और दक्षिणी राज्यों से 66 जनजातियों के 285 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। क्षेत्रीय संवाद सम्मेलन जनजातीय समुदायों के बीच छह जनजातीय संवाद की एक शृंखला है, जिसका समापन 15-19 नवंबर को झारखंड के जमशेदपुर में मुख्य सम्मेलन में होगा। इस वर्ष के शेष क्षेत्रीय संवाद नागालैंड, छत्तीसगढ़ और झारखंड में होंगे।
उन्होंने बताया कि संवाद आदिवासियों के विचारों, धारणाओं और उनकी ङ्क्षचताओं को साझा करने के लिए एक मंच है। संवाद अब एक इकोसिस्टम के रूप में तेजी से फैल रहा है, जहां जनजातीय विचार और स्वर विभिन्न रूपों में प्रकट होते हैं। चाहे वह एक वार्ता, अनुसंधान कार्य, संगीत, भोजन व व्यंजन सहयोग के रूप में हो या फिर डॉक्यूमेंट्री के रूप मेंं।
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फतहसागर की पाल पर गवरी का मंचन
उदयपुर. जिला प्रशासन एवं माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में मेवाड़ के पारम्परिक जनजाति लोक नृत्य नाट्य ‘‘गवरी’’ का मंचन सोमवार को फतहसागर पाल,देवाली छोर पर किया गया। जिसमें झाड़ोल की गवरी कलाकार दल ने गवरी के विभिन्न कथानक पर आधारित खेलों का मंचन किया। इसमें लगभग 150 कलाकार ने अपनी कलाओं का प्रदर्शन किया।
संस्थान के निदेशक दिनेश चन्द्र जैन, एवं निदेशक (सांख्यिकी) बी.एल.कटारा ने श्रीफल एवं पुष्पमालाओं के साथ गवरी कलाकारों का स्वागत किया। गवरी को देखने के लिये स्थानीय व्यक्ति, देशी व विदेशी पर्यटकों बड़ी तादाद में उपस्थित रहे। इसी क्रम में मंगलवार 18 सितम्बर को फतहसागर पाल के देवाली छोर पर जेमली गाॅव पंचायत समिति गोगुन्दा की गवरी का मंचन होगा। इसके साथ ही यहाॅ पर पारम्परिक फुड मेले का आयोजन भी होगा, जिसमें विभिन्न पारम्परिक एवं पौष्टिक व्यंजनों की स्टाॅल लगाई जाकर इनसे होने वाले लाभ एवं महत्व की जानकारी दी जाएगी।





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