सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में बाघों के गायब होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रणथम्भौर से एक के बाद एक बाघ गायब हो रहे है और विभाग बाघों का पता नहीं लगा पा रहा है। आवंड क्षेत्र में अप्रेल में दो शावकों की मौत की गुत्थी अभी सुलझी भी नहीं है कि गत दिनोंं फलौदी रेंज के आवण्ड क्षेत्र से ही बाघ टी-77 के गायब होने की सूचना मिली थी। विभाग अभी टी-77 का पता भी नहीं लगा पाया कि अब जोन दस के आसपास के क्षेत्र से ही टी-78 के गायब होने की सूचना आ रही है। रणथम्भौर से एक ओर बाघ के गायब होने से वन विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं।
यह है टी-78 की कहानी
टी-78 बाघिन टी-13 का मेल शावक है और इसका विचरण जोन दस के झोझेश्वर, आवण्ड वन क्षेत्र व उसके आसपास के इलाके में रहता था। बाघिन टी-13 के जोन दस में टेरेटरी बनाने के बाद 2014 में बाघिन टी-13 ने बाघ टी-43 के साथ मैटिंग की। इससे बाघिन टी-13 के तीन संतानें हुई। इनमें से टी-78 भी एक है।
2016 में दिए नम्बर
बाघ टी-43 के साथ मैटिंग के बाद बाघिन टी-13 ने एक साथ तीन नर शावकों को जन्म दिया। इन शावकों को 2016 में वन विभाग की ओर से टी-78, टी-79 व टी-80 नम्बर दिए।
टी-13 ने दी पांच संतानें
रणथम्भौर में बाघिन टी-13 में कुल पांच संतानें दी। 2008 में बाघिन टी-13 जोन छह में विचरण करती थी। इस दौरान बाघ टी-12 के साथ मैटिंग हुई। इसके बाद 2008 में ही बाघ टी-12 को सरिस्का शिफ्ट कर दिया गया। टी-12 के सरिस्का शिफ्ट होने के कुछ माह बाद बाघिन टी-13 ने दो शावकों को जन्म दिया। जिनकी बाद में मौत हो गई। इसके बाद जोन दस में बाघिन ने तीन और शावकों को जन्म दिया।
चार माह से नहीं आ रहा नजर
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बाघ टी-78 भी रणथम्भौर में पिछले चार माह से नजर नहीं आ रहा है हालांकि वन विभाग बाघ के गायब होने या किसी अन्य अभयारण्य में जाने की पुष्टि नहीं कर रहा है, लेकिन बाघ के नजर नहीं आने से वन विभाग की चिंताएं बढ़ गई है। विभाग की ओर से बाघ की टे्रकिंग के प्रयास किए जा रहे हैं।
इनका कहना है...
टी-78 का मूवमेंट जोन दस में व आसपास के क्षेत्र में रहता था। अभी कुछ दिनों से बाघ नजर नहीं आ रहा है।
- कप्तान सिंह, रेंजर, फलौदी रेंज, रणथम्भौर





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