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बे बस यात्री, 80 से अधिक रोडवेज बसों के थमे पहिये...अनिश्चितकालिन हड़ताल एक दिन में 10लाख रूपए आर्थिक नुकसान-

बूंदी. रोडवेज के विभिन्न संगठनों के संयुक्त मोर्चा के आव्हान पर प्रदेशभर में रविवार रात 12बजे से ही चक्काजाम हड़ताल के बाद रोडवेज के पहिए थम गए। वार्ता विफल होने से नाराज कर्मचारियों ने अनिश्चितकालिन हड़ताल का रूख अपनाते हुउ सरकार को जमकर कोसा।

 

हड़ताल के बाद जिले में करीब 80से अधिक रोडवेज बसों का संचालन ठप हो गया और यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। इससे राज्य पथ परिवहन निगम बूंदी को प्रतिदिन करीब 10 लाख रूपए का आर्थिक नुकसान होगा। बूंदी डिपो के करीब 272कर्मचारी हड़ताल पर है, चालक, परिचालक मेकेनिकल कर्मचारी हड़ताल पर चले गए।

 

सुबह से सभी कर्मचारी सरकार के विरोधी नारे लगाते हुए धरने पर बैठे रहे। एटक सचिव अशोक सक्सेना, दिपक शर्मा ने बताया कि संयुक्त मोर्चा का 27 जुलाई को राज्य सरकार से हुए समझोते को लागू नही करने एवं रोडवेज द्वारा कर्मचारियों को 150 करोड़ रूपए देने का वादा किया था। 100करोड़ रूपए अभी तक भी नही दिए गए है, जिससे कर्मचारियों का बकाया पेमेंट नही हो पा रहा है।

 

सातवां वेतन, आयोग लागु नही किया गया न ही नई बसे एवं नई नियुक्ति की प्रतिक्रिया पूरी नही की गई है। हर माह 45 करोड़ रूपए अनुदान राशि दने का वादा किया था उसमें से 25 करोड रूपए प्रतिमाह दिए जा रहें है। जिसके चलते रोडवेज कर्मचारियों में आका्रेश व्याप्त है। सरकार झुठे वादे करती है। प्रदेश भर में एक हजार बसे कंडम हो चुकी है।

 

सरकार ने नई बसो का वादा किया था लेकिन अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नही हुई। सरकार की इन्हीं वााखिलाफी को लेकर कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। उन्होनें कहा कि जब तक कर्मचारियों की मांगे नही मानी जाएगी हड़ताल अनिश्चितकालिन रहेगी।


नही मिला कोई साधन धक्के खाते रहे यात्री-


सोमवार को मुख्यमंत्री की गौरवयात्रा के चलते रोडवेज बसों की हड़ताल ने कोढ में खाज का काम किया। आवाजाही के लिए लोक सेवा की बसे भी यात्रियों को नही मिल पाई। जो बसे संचालित थी वही सीधे बाइपास से होकर गुजरी, वही नीजि बसों को मुख्यमंत्री की सभा स्थल पर लोगो को लाने ले जाने में लगाया गया जिससे यात्रियों को अपने गन्तव्य स्थल तक पहुंचने के लिए पसीना बहाना पड़ा।

 

सोमवार को मौसम ने भी यात्रियों को खुब तपाया। दिनभर तेज गर्मी से यात्री बेहाल नजर आए। घंटो बस स्टेंड के बाहर व परिसर में बसों का इंतजार करते रहे।


जीप मिनी बसों की हुई चांदी-


कोटा से बूंदी व आसपास क्षेत्र में जीप व मिनी बसों का संचालन रहा लेकिन इन गाडी की संख्या भी कम ही नजर आई। जीप में क्षमता से अधिक सवारी ठूंस ठूंस कर भरी गई। यात्रियों की मजबूरी का फायदा जीप संचालको ने जमकर उठाया।

 



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