कोटा. शिक्षानगरी का स्मार्ट सिटी में चयन हुए गुरुवार को दो साल पूरे हो जाएंगे। दो साल में स्मार्ट सिटी के करीब 90 फीसदी प्रोजेक्ट आज भी फाइलों में ही दौड़ रहे हैं। प्रोजेक्ट में दशहरा मैदान की प्रगति जरूर गिनाने लायक नजर आ रही। प्रथम फेज का करीब 90 फीसदी काम पूरा हो गया है। दो साल में स्मार्ट सिटी कम्पनी बोर्ड की आधा दर्जन बैठकें हो चुकी हैं, कई महत्वपूर्ण निर्णय किए जा चुके, लेकिन प्रगति की कछुआ चाल से जनप्रतिनिधि भी परेशान हैं। सांसद ओम बिरला ने पिछले दिनों नई दिल्ली में केन्द्रीय शहरी मंत्री से मुलाकात कर धीमे कार्यों को गति देने की मांग उठाई थी। विधायक संदीप शर्मा ने विधानसभा में यह मसला उठाया। पेश है पत्रिका की स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर विशेष रिपोर्ट:
1300 एकड़ में होने थे काम
स्मार्ट सिटी परियोजना में शहर के मध्य 1300 एकड क्षेत्र में आधुनिकीकरण (रिट्रोफिटिंग) के तहत विभिन्न कार्य करवाए जाने हैं। इसमें जेके. पेवेलियन क्षेत्र से किशोर सागर तालाब, कोटड़ी तालाब, दशहरा मैदान, कोचिंग सिटी आदि शामिल हैं। साथ ही कच्ची बस्ती विकास की योजना भी सम्मिलित है। क्षेत्र आधारित परियोजना में लगभग शहर की 11.5 प्रतिशत जनसंख्या कवर की गई है।
किशोर सागर पर्यटन स्थल
इस प्रोजेक्ट में किशोर सागर, कोटड़ी तालाब को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना प्रस्तावित है। किनारे पर सुविधाएं एवं पर्यटन गतिविधियां संचालित की जानी हैं और ट्यूरिस्ट हट बनने थे।
हकीकत : दोनों ही प्रोजेक्ट अभी कागजों में ही हैं। पिछले महीने जयपुर में हुई स्मार्ट सिटी प्रबंधन मण्डल की बैठक में दोनों प्रोजेक्ट की डीपीआर को मंजूरी मिली है। धरातल पर उतरने में करीब एक साल लगेगा।
चौबीस घण्टे पानी-बिजली
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शहर में चौबीस घण्टे पानी-बिजली की आपूर्ति की जानी थी। केन्द्र
सरकार को दो साल भेजी पहले रिपोर्ट में कहा था कि यह प्रोजेक्ट इससे पहले पूरा होगा, क्योंकि शहर के ज्यादातर हिस्से में अभी चौबीस घण्टे पानी-बिजली की आपूर्ति होती है। चम्बल होने से पानी की कोई दिक्कत नहीं है।
वर्षा जल संचयन करना था।
हकीकत : हाल में 154 करोड़ की योजनाओं की डीपीआर मंजूर हुई। जलापूर्ति कार्यों के टेण्डर की प्रक्रिया शुरू की गई है। पुरानी पाइप लाइनें बदलेंगी, पानी के भी स्मार्ट मीटर लगेंगे। चट्टानी क्षेत्र होने से रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट सफल नहीं हुए।
स्मार्ट सीवरेज सिस्टम
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सीवरेज सिस्टम पर विशेष फोकस देना था। पूरे शहर के सीवरेज सिस्टम को स्मार्ट बनाने का खाका तैयार किया गया है।
हकीकत : सीवरेज सिस्टम अस्त-व्यस्त है। विज्ञान नगर समेत नए कोटा में सीवरेज की गंभीर समस्या है। पिछले दिनों 53 करोड़ का बजट मंजूर हुआ। अब जमीनी काम करने पर जोर दिया जा रहा है।
साइकिल शेयरिंग
निगम ने 15 जून 2017 को ग्रीन राइड साइकिल सेवा शुरू कर दी है। साइकिल शेयरिंग प्रोजेक्ट शुरू करने वाला कोटा प्रदेश का पहला शहर बना था, रिचार्ज कार्ड से साइकिल किराए पर दी जाती थी।
हकीकत : शहर में साइकिल शेयरिंग के एक दर्जन स्टैण्ड बन गए हैं, स्टैण्डों के ताले लटके हैं। पिछले दिनों नगर निगम ने कम्पनी को नोटिस
भी थमा दिया था। यह प्रोजेक्ट भी कागजी ही साबित हुआ है।
ठोस कचरा प्रबंधन
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन भी करना था। कचरे से खाद बनाने सहित अन्य प्रोजेक्ट शुरू किए जाए थे। प्लास्टिक वेस्ट से सड़क बनाने का प्रोजेक्ट शुरू किया था।
हकीकत : एसएलआरएम प्रोजेक्ट शुरू होकर बंद हो गया है। कम्पनी कोटा छोड़कर चली गई है। लाखों रुपए का बजट अनुपयोगी खर्च किया है। इसके संसाधन निगम में कबाड़ में पड़े हैं।
ई बसें दौडऩी थी
स्मार्ट सिटी में ई बसें चलाई जानी थी। ई-बसें अभी नई दिल्ली में संचालित हो रही हैं।
हकीकत : शहर में ई-बसें नहीं चल रही है। बजट जरूर स्वीकृत हो गया है।
स्मार्ट रोड
क्षेत्र आधारित योजना में एकीकृत सड़क को नया स्वरूप दिया जाना था। इसमें मुख्य सड़क 16 किमी शामिल की गई। एकीकृत सड़क को नया स्वरूप देने के लिए 165 किमी अन्य सड़कें शामिल की गई हैं।
हकीकत : छह माह पहले हुई स्मार्ट सिटी कम्पनी बोर्ड की बैठक में शहर के पांच मुख्य मार्गों को स्मार्ट रोड के रूप में विकसित करने की मंजूरी मिली। डीपीआर तैयार की गई है, लेकिन काम धरातल पर नहीं उतर पाए।
पेन सिटी में थे ये तीन प्रोजेक्ट
पेयजल नियोजन : स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम, ऑटोमेशन, हेलियम गैस आधारित लीकेज डिटेक्शन सिस्टम लागू जाना है।
सोलिड वेस्ट मैनेजमेन्ट : - सोलिड लिक्विड रिसोर्स प्रोजेक्ट के अन्तर्गत शहर में निर्मित सभी कचरे का निस्तारण एवं कचरे द्वारा आय का साधन तैयार करना है।
स्मार्ट इंटिग्रेटेड ट्रान्सपोर्ट सिस्टम : इसमें सीसीटीवी, ई चालान, कमांड एण्ड कन्ट्रोल सिस्टम लागू करना, पेडेस्ट्रियन एवं साइकिल के लिए सुविधाएं, स्मार्ट पार्किंग सिटी मोबाइल एप आदि शामिल किया गया है।
ऐसे होगा क्षेत्र आधारित विकास
स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव में क्षेत्र आधारित विकास (एरिया बेस्ड डेवलपमेंट) के लिए सिविल लाइंस स्थित नेहरू पार्क , किशोर सागर, कोटड़ी तालाब, दशहरा मैदान, कोचिंग क्षेत्र, गोबरिया बावड़ी क्षेत्र का विकास किया जाना प्रस्तावित है। स्मार्ट सिटी चयन के वक्त क्षेत्र के विकास के लिए 72 फीसदी लोगों ने वोटिंग की थी।
यह होगा बड़ा काम
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में आईएल टाउनशिप में 29 करोड़ की लागत से ऑक्सीजोन बनाने का महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट हाथ में लिया गया है। पत्रिका की पहल पर शहर को यह सौगात मिली है। प्रोजेक्ट के शुरू करने में जिला कलक्टर गौरव गोयल की अहम भूमिका रही है
गिनने को सिर्फ ये दो उपलब्धियां
1. दशहरा मैदान: पहला फेज तैयार
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में दो साल में सबसे बड़ा काम दशहरा मैदान को स्मार्ट ग्राउण्ड बनाने का हुआ है। दो साल में दशहरा मैदान का भव्य स्वरूप सामने आ गया है। धौलपुर स्टोन ने मैदान की शान बढ़ा दी है। प्रथम फेज का काम पूरा होने वाला है। दूसरे और तीसरे चरण की काम भी जल्द शुरू होने वाले हैं। बड़ी उपलब्धि यह कि नगर निगम स्वामित्व के दशहरा मैदान के भूखण्डों की नीलामी नहीं होने के कारण मैदान के विकास कार्य के लिए निगम को जो 140 करोड़ रुपए देने थे, अब कोटा स्मार्ट सिटी कम्पनी अपने स्तर से ही वहन करेगी। मैदान की जमीन बिकने से बच गई है।
2. स्मार्ट क्लास रूम को अमलीजामा
स्मार्ट सिटी के तहत शहर में स्मार्ट क्लास रूम में भी तैयार हो गए हैं। इसमें बच्चों को आधुनिक संसाधनों से शैक्षणिक माहौल मिल रहा है। हाइटेक क्लास रूम तैयार किए हैं। ई- लाइब्रेरी भी शुरू हो गई है।





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