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साहित्यकार सम्मान : वैचारिक आधार के बिना कालजयी रचना का निर्माण नहीं


श्रीडूंगरगढ़. साहित्यिक संस्था राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की ओर से शुक्रवार को कस्बे के संस्कृति भवन में साहित्यकार सम्मान समारोह हुआ। इसमें संस्था की सर्वोच्च उपाधि साहित्यश्री सहित राजस्थानी साहित्य सृजन व युवा साहित्य पुरस्कार से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर साम्प्रदायिक समरसता और हिन्दी विषय पर संगोष्ठी भी हुई। समारोह में मुख्य अतिथि प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक श्यामसिंह राजपुरोहित ने कहा कि साहित्यकार समाज को दर्पण दिखाता है। भाषा का साम्प्रदायिकता से कोई लेना देना नहीं है, जो साम्प्रदायिक होगा वो समरस नहीं होगा।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए भाईचारा फाउंडेशन जयपुर के वेद व्यास ने कहा कि जब तक लेखक के विचार व शब्दों में दृढ़ता नहीं होगी, तब तक वह कोई रास्ता नहीं बना पाएगा। लेखक वैचारिक आधार के बिना कालजयी रचना का निर्माण नहीं कर सकता। विशिष्ट अतिथि जयपुर के डॉ. चन्द्रभान भारद्वाज ने कहा कि व्यक्ति को संस्कारित करने में भाषा ने योगदान दिया है। साहित्यश्री से पुरस्कृत डॉ. माधव नागदा ने बताया कि साहित्य जोडऩे का काम करता है जो रचना तोडऩे का काम करे, वह साहित्य नहीं है। हिन्दी सृजन से पुरस्कृत हरीश करमचन्दानी ने कहा कि बाजारवाद के समय में यह संस्था साहित्य व हिन्दी भाषा का प्रचार प्रसार समूचे भारत में कर रही है। इस अवसर पर डॉ. मंगत बादल ने बताया कि अन्याय के प्रतिरोध के लिए कलम ही एक माध्यम बचा है। डॉ. अनुश्री राठौड़, जाकिर आदीब आदि ने भी विचार रखे। संस्था अध्यक्ष श्याम महर्षि ने भाषा के विकास में संस्थागत एवं जनसहयोग की हिमायत करते हुए भाषायी विकास की बात कही। युवा साहित्यकार रवि पुरोहित ने कहा कि साहित्यकार किसी सामाजिक विद्रुप या मू्रल्यगत विचलन के विरूद्ध आवाज नहीं उठाए तो यह सांस्कृतिक हमले का ही प्रतिरूप है। समाजसेवी शिवप्रसाद सिखवाल व महावीर माली ने भी विचार रखे। संस्था के मंत्री बजरंग शर्मा ने आभार जताया। इस दौरान डॉ. चेतन स्वामी, शोभाचन्द आसोपा, रामचन्द्र राठी, डॉ. महावीर पंवार, सत्यदीप, डॉ. मदन सैनी, तुरजमल बोधीजा, भंवरलाल भोजक, श्रीभगवान सैनी, रेवन्त मल नैण, दयाशंकर शर्मा सहित कई विद्वजन उपस्थित थे।

 

ये हुए पुरस्कृत
लालमादड़ी के कथाकार व समालोचक माधव नागदा को सामाजिक सराकारों के लिए मल्लाराम माली की स्मृति में दी जाने वाली संस्था की सर्वोच्च उपाधि साहित्यश्री से अलंकृत किया गया। इसी प्रकार डॉ. नन्दलाल महर्षि स्मृति हिन्दी सृजन पुरस्कार जयपुर के हरीश करमचंदाणी, पंडित मुखराम सिखवाल स्मृति राजस्थानी साहित्य सृजन पुरस्कार रायसिंहनगर के मंगत बादल व बृजरानी भार्गव स्मृति युवा साहित्य पुरस्कार बीकानेर के सुमित शर्मा को दिया गया। सम्मान स्वरूप ११-११ हजार रुपए व युवा पुरस्कार इक्यावन सौ रूपए, प्रशस्ति पत्र, शॉल एवं प्रतीक चिह्न दिया गया।

 

कहानी प्रति. सम्मान
समारोह में संस्था की ओर से बख्तावर सिंह राजपुरोहित राजस्थानी कहानी प्रतियोगिता में प्रथम रही। डॉ. अनुश्री राठौड़, द्वितीय सन्तोष चौधरी, तृतीय राजेन्द्र शर्मा मुसाफिर को पुरस्कृत किया गया। इसके अलावा वाजिद हसन काजी, मनोज कुमार स्वामी, किशोर कुमार निर्वाण, विमला नागला व सुनील कुमार गज्जाणी को सान्तवना पुरस्कार दिया गया।



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