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नेताओं ने पकड़ी कमजोर नस, वहां कर रहे सभाएं, मेल-मिलाप बढ़ाया

भीलवाड़ा

 

विधानसभा चुनाव- 2013 में कांग्रेस व भाजपा के नेताओं को जहां शिकस्त मिली, अब वहां दोनों का ज्यादा ध्यान है। इन बूथों पर नेताओं के दौरे ज्यादा हो रहे हैं। भाजपा व कांग्रेस ने अपने पार्टी के कार्यक्रमों के लिए एेसे स्थानों का स्थान किया है, जहां पिछले चुनावों में उन्हें कम वोट मिले थे। यहां सभाओं के साथ ही कार्यकर्ताओं से मेल-मिलाप बढ़ाया है। साथ ही जो मजबूत बूथ है , इस बार वे कहीं हाथ से न फिसल जाए, इसे लेकर भी दोनों ही प्रमुख दल अपनी रणनीति बना रहे है।

दोनों दलों ने इस बार सर्वाधिक फोकस उन बूथ पर किया है, जहां वे पिछली बार प्रतिद्धंदी से बहुत पीछे रह गए थे। ऐसे क्षेत्रों में संगठन मजबूत बनाने के लिए बूथ प्रभारी से लेकर पन्ना प्रभारी तक का प्रयोग किया गया है। बूथ सम्मेलन भी ऐेसे क्षेत्रों में पहले कराए जा रहे, जहां पिछली बार प्रदर्शन बहुत खराब रहा था।

 

क्यों मिली कुछ बूथों पर एकतरफा जीत


ुुपिछले चुनाव म़ें विजयी प्रत्याशी एवं निकटतम प्रतिद्धंदी के कुछ बूथों पर एकतरफा जीत हासिल करने के पीछे मुख्य कारण ऐसे बूथ पर उनका खास प्रभाव या गृह क्षेत्र का होना भी है। ऐसे में उन बूथों पर एकतरफा वोटिंग हुई। बड़े अंतर वाले बूथ का जातिगत व क्षेत्रगत समीकरण भी अलग रहा। यहां लोगों ने लामबंद होकर किसी एक प्रत्याशी के पक्ष में वोट दिए।


पांच साल में बदल गए पूरे परिणाम

जिले में वर्ष 2008 एवं वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव परिणाम पूरी तरह बदल गए। वर्ष 2008 में जहां जिले के सभी पांच विधानसभा क्षेत्रों से कांग्रेस प्रत्याशी जीते तो थे, वहीं वर्ष 2013 के चुनाव में इसके बिल्कुल विपरीत परिणाम आए और सभी पांचों सीट भाजपा प्रत्याशियों ने जीत ली। मतदाताओं के इस एकतरफा वोटिंग ट्रेंड ने जिले में दोनों दलों के नेताओं के आशंकित कर रखा है।

 


आसींद

बूथ बीजेपी बूथ कांग्रेस
33 662 257 622

52 646 227 607
249 603 220 727

265 601 217 555
237 575 215 572

मांडल
184 740 188 601
226 713 53 450

254 713 21 428
117 675 43 420

212 669 174 412

सहाड़ा


215 839 41 631

234 684 246 582
83 642 128 580

159 627 143 541
199 608 173 536

भीलवाड़ा

164 807 126 806
129 764 147 746

16 752 130 658
172 744 140 653

74 742 5 641

 

शाहपुरा

135 840 190 596

42 694 172 555
33 686 226 515

59 671 144 461
192 670 175 457

 

जहाजपुर

16 828 51 963
61 798 201 861

43 699 20 ****
1 6 70 225 768

234 666 186 719

 

मांडलगढ़

208 726 202 739

207 722 50 686
200 666 152 681

247 654 82 636
210 653 201 617

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कमजोर बूथ पर अब मजबूती

हमने प्रत्येक बूथ की ग्रेडिंग की है। इसी ग्रेडिंग के आधार पर कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की है। जो बूथ कमजोर है, वहां मजबूत कार्यकर्ता को लगाया है। जिले में कुछ बूथ एेसे भी है जो कि प्रत्याशी, जाति व भौगोलिक स्थिति पर आधारित रहते हैं। यहां का भी अध्ययन कर लिया गया है। प्रयास यह है कि जो बूथ सर्वाधिक मजबूत है, वहां वोटों की संख्या और बढ़ाया जाए। इसके लिए भी विशेष कार्ययोजना प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर बनाई गई है।

दामोदर अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष

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सभी बूथों पर समान नजर

वर्ष 2013 के चुनावी परिणाम के विश्लेषण के बाद जिले में कांग्रेस ने व्यापक दौरा कर कमजोर व मजबूत बूथों को लेकर क्षेत्र के वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। 384 ग्राम पंचायतों में से 380 ग्राम पंचायतों पर बैठकें आयोजित की जाकर यहां के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को बूथों की जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है। शेष पंचायतों की बूथों की पुन: समीक्षा 10 सितम्बर तक कर ली जाएगी। कमजोर बूथों की स्थिति में अब पहले से अधिक सुधार हुआ है। वहीं मजबूत बूथ है वो कहीं कमजोर साबित न हो इसके लिए भी पार्टी स्तर पर विशेष रणनीति बनाई गई है।

रामपाल शर्मा, कांग्रेस जिलाध्यक्ष



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