भीलवाड़ा.
खातेदारी भूमि में सेंडस्टोन के क्वारी लाइसेंस देने के लिए खान विभाग ने न्यूनतम क्षेत्रफल एक हैक्टेयर तो तय कर दिया, लेकिन इसमें सिंचित भूमि होने पर लाइसेंस नहीं देने की शर्त रख दी है। अब बिजौलियां क्षेत्र के सेंडस्टोन के उद्यमी असमंजस में हैं। उनका कहना है कि जब खातेदारी भूमि के नियमों में सिंचित भूमि पर भी खनन पट्टा दिया जा सकता है तो सेंडस्टोन क्वारी लाइसेंस क्यों नहीं।
व्यापारी असमंजस में हैं...
हाल ही खान एवं भू विज्ञान विभाग निदेशक जेके उपाध्याय ने आदेश जारी किया था कि न्यूनतम एक हैक्टेयर में सेंडस्टोन क्वारी लाइसेंस दिए जाएंगे। खातेदारी भूमि में राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, बंजर, बारानी अथवा असिंचित भूमि में ही क्वारी लाइसेंस जारी किए जा सकेंगे। मौके पर सिंचित भूमि हो तथा राजस्व रिकॉर्ड में बंजर, बारानी अथवा असिंचित भूमि हो तो उसमें क्वारी लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे। इस फैसले से बिजौलियां, चित्तौडग़ढ़, बालेसर व जोधपुर के सेंडस्टोन उद्योगों ने काफी उम्मीद लगाई थी, लेकिन अब व्यापारी असमंजस में हैं।
खनिज नीति में नहीं जोड़ा था नियम
28 फरवरी 2017 को जारी खनिज नीति में अफसरों ने सिंचित भूमि के नियम को नहीं जोड़़ा। खातेदारी में खनन पट्टे देने में भी यह बाध्यता नहीं रखी गई है। इस कारण उद्यमी इस नियम का विरोध कर रहे हैं।
नहीं बचा है अब एरिया
उद्यमियों का कहना है कि पहले बंजर व बारानी भूमि में तीन सौ से ज्यादा एग्रीमेंट हुए थे। एेसे में क्षेत्र कम बचा है। अब सेंडस्टोन उद्योग को विस्तार देने के लिए जरूरी है कि सिंचित भूमि को भी शामिल किया जाए। इसमें कई जगह पानी नहीं होने पर भी रिकॉर्ड में सिंचित दर्शा रखा है। एेसे में क्वारी लाइसेंस नहीं लिया जा सकता है। बिजौलियां क्षेत्र में करीब 1500 क्वारी लाइसेंस हैं।
कोई फायदा नहीं
सेंडस्टोन क्वारी लाइसेंस में सिंचित भूमि का विकल्प जोड़ दिया गया है। खनन पट्टे में सिंचित भूमि में पट्टा दिया जा सकता है तो सेंडस्टोन क्वारी लाइसेंस क्यों नहीं। इस नए नियम से कोई फायदा नहीं मिलेगा।
रामप्रसाद विजय, कार्यालय मंत्री, ऊपरमाल पत्थर खान व्यवसायी संघ





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