बहरावण्डा खुर्द. टोंक-शिवपुरी स्टेट हाइवे स्थित छाण गांव में पशु चिकित्सालय तो है, लेकिन उस पशु चिकित्सा उपकेन्द्र पर गत तीन महीने से कोई चिकित्सक या कम्पाउण्डर नहीं होने की वजह से छाण सहित आस-पास के गांवों के लोगों को काफी असुविधा हो रही है। हालात ये है कि ग्रामीण पशुपालकों को निजी पशु चिकित्सकों की शरण लेनी पड़ रही है जो उनकी जेब पर भारी पड़ रहा है। समाजसेवी जुनैद खान सहित ग्रामीणों ने बताया कि बारिश की वजह से इन दिनों पशुओं में रोग आ रहा है। ऐसे में पशु चिकित्सा उपकेन्द्र बन्द रहने से ग्रामीणों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही है। मजबूरन उन्हें निजी चिकित्सकों की ओर रुख करना पड़ता है, जिससे उनको आर्थिक समस्याएं भी आ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि इस बारे में अधिकारियों को अवगत करवाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीण पशुपालकों ने बताया कि तीन माह पहले तक यहां एक पशु कम्पाउण्डर कार्यरत था, जिससे लोगों को काफी सहूलियत थी, लेकिन उसका स्थानान्तरण हो जाने के बाद से छाण में पालतू पशुओं को देखने वाला कोई नहीं है। विभागीय अधिकारियों ने अभी तक छाण में कोई चिकित्सक या कोई कम्पाउण्डर नियुक्त नहीं किया है, जिससे ग्रामीण पशुपालकों की समस्या का समाधान हो सके।
काफी तादात में है पशुधन
ग्रामीणों ने बताया कि केवल छाण में ही करीब दो से तीन हजार के करीब पशुधन है, जिनमें बकरियों एवं भैंसों की तादात बहुतायत में है। यहां के ग्रामीण अधिकतर पशुपालन पर निर्भर है। ऐसे में पशुधनों में आए रोगों का समय पर उपचार नहीं होने से उनकी जान तक चली जाती है। ग्रामीण पशुपालकों ने छाण में पशु चिकित्सक लगाने की मांग की है।
नहीं हो रही सुनवाई
पशुपालकों ने बताया कि पशु चिकित्सकों के अभाव में बीमार पशुओं का समय पर इलाज नहीं हो पा रहा है। ऐसे में पशुपालकों को दूसरे स्थानों पर पशुओं का इलाज करान पड़ता है। बारिश के बाद पशुओं में कई प्रकार की बीमारियां फैल रही है।





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