भीलवाड़ा।
कपड़ा व्यापारियों व निर्यातकों ने जीएसटीआर 3-बी रिटर्न दाखिल नहीं किया है। अन्तिम तारीख २० सितम्बर थी, लेकिन किसी टेक्सटाइल व्यापारी ने रिटर्न दाखिल नहीं किया। व्यापारियों को अब २५ रुपए प्रतिदिन के आधार पर पैनल्टी तथा १८ प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज देना होगा।
केन्द्र सरकार ने गत दिनों अधिसूचना जारी कर जुलाई २०१७ से जुलाई २०१८ के टैक्स की गणना कर अगस्त से सितम्बर में भरे जाने वाले जीएसटीआर-३बी रिटर्न में लैप्स करना था। सरकार की ओर से सॉफ्टवेयर में एक चूक ने देश के सभी टेक्सटाइल व्यापारियों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। सॉफ्टवेयर में अगस्त २०१८ की करंट आइटीसी में से यह गणना लैप्स हो रही है। इससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
नेट आइटीसी कम होने से रिफण्ड भी कम मिलेगा। अब निर्यातक सॉफ्टवेयर के आधार पर ३ बी रिटर्न भरते हैं, तो उन्हें लाखों रुपए का नुकसान होता है। नहीं भरने पर उन्हें पेनल्टी व ब्याज देना होगा। ऐसे में देश भर के व्यापारियों ने निर्णय किया है कि वे ३ बी रिटर्न दाखिल नहीं करेंगे। व्यापारियों के इस निर्णय से सितम्बर माह का रिटर्न भी अक्टूबर माह में दाखिल नहीं हो सकेगा।
यंू समझें गणित
विशेषज्ञ की माने तो ५० प्रतिशत कपड़ा स्थानीय व्यापारियों को सप्लाई किया तथा शेष ५० प्रतिशत कपड़ा या अन्य उत्पाद का निर्यात किया गया है। इसकी नेट आईटीसी १० लाख रुपए बनती है। तो उसका रिफण्ड ५ लाख रुपए बनता है। लेकिन इस सोफ्टवेयर की गड़बड़ी से अब नेट एक्युमलेटेड टेक्स क्रेडिट (आईटीसी) रिफंड आठ लाख हो तो अगस्त की आईटीसी २ लाख शेष रहती है। और इसी निर्यात पर एक लाख रुपए का ही रिफण्ड मिलेगा। जबकि निर्यातकों को कम से कम पांच लाख रुपए रिफण्ड मिलना चाहिए। ऐसे में निर्यातको को चार लाख रुपए का आर्थिक नुकसान हो रहा है।
यह है समाधान
जीएसटी लागू होने की तारीख एक जुलाई २०१७ से जुलाई २०१८ तक की आइटीसी का बैलेंस पड़ा है। उसी राशि में से एक्युमलेटेड टेक्स क्रेडिट लैप्स होना चाहिए। इसी सिस्टम को जीएसटी के सोफ्टवेयर में बदलाव करना होगा। इसके बिना ३बी रिटर्न भरना भी मुश्किल होगा।
वित्त मंत्री व जीएसटी काउंसिल को लिखा
जीएसटीआर ३बी के रिटर्न भरने के सॉफ्टवेयर में हुई गड़बड़ी से निर्यातकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारी रिटर्न नहीं भर पा रहे हैं। सॉफ्टवेयर में सुधार करने के लिए वित्त मंत्री व जीएसटी काउंसिल को पत्र लिखा है।
आरके जैन,
महासचिव, मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री





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