कंवला का मामला...
जालोर. कंवला ग्राम सेवा सहकारी समिति के सहायक व्यवस्थापक चंदनसिंह को गड़बड़ी और धांधली के मामले में निलंबित किया गया। सहायक व्यवस्थापक पर बीमा में दर्ज की गई भूमि और राजस्व रिकार्ड में गड़बड़ी का मामला था। मामले के अनुसार चंदनसिंह के विरुद्ध प्राप्त शिकायत की जांच तहसीलदार आहोर स्तर से की गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार समंदरसिंह, विजयसिंह, किशनसिंह, मंगलसिंह, चंदनसिंह, दशरथसिंह, निर्मलसिंह, जितेंद्रसिंह, सवाराम, मूलाराम एवं संतोष कंवर की बीमा में दर्ज की गई भूमि राजस्व रिकार्ड के अनुसार कम हैक्टेयर में पाई गई। जिसके संदर्भ में अध्यक्ष को 8 जून 2018 द्वारा चंदनसिंह सहायक व्यवस्थापक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए समिति की अनुशासन उप समिति को निर्देश दिए गए, परंतु अनुशासन उप समिति द्वारा संतोषजनक कार्रवाई नहीं करने के कारण प्रकरण को जिला स्तरीय कमेटी रखा गया। समिति एवं किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सहायक व्यवस्थापक चंदनसिंह के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए जिला स्तरीय परामर्शदात्रि समिति की बैठक 2 अगस्त 2018 एवं 10 अगस्त 2018 में उपस्थित रहने के निर्देशों के बावजूद भी समिति अध्यक्ष द्वारा बैठक में अनुपस्थित रहने के कारण द्वारा जिला स्तरीय परामर्श समिति द्वारा राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना खरीफ फसल वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 की सूची में दर्ज की गई धांधली व जांच के दौरान मूल दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने, जांच में सहयोग नहीं करने के कारण जिला स्तरीय समिति के निर्णय अनुसार कृषि ऋषदात्रि सहकारी समितियों के कर्मचारियों के चयन नियुक्ति एवं सेवा शर्त 2008 के अष्ठम खंड के 39 (१) के अंतर्गत कंवला े सहायक व्यवस्थापक को निलंबित किया गया।
जहां गड़बड़ी की शिकायत, वहीं पर कार्यभार
गड़बड़ी और धांधली के आरोपित सहायक व्यवस्थापक चंदनसिंह का निलंबन काल में मुख्यालय कंवला समिति ही रहेगा। साथ ही उनका कार्यभार ऋण पर्यवेक्षक आहोर को सुपुर्द किया गया है।
ग्रामीणों ने मुख्यालय बदलने की मांग की
कंवला ग्राम सेवा सहकारी समिति में सहायक व्यवस्थापक पर इसी सहकारी समिति में गड़बड़ी और धांधली के गंभीर आरोप है। हालांकि जांच के बाद सहायक व्यवस्थापक को सस्पेंड जरुर कर दिया गया है, लेकिन इस प्रकरण में निलंबन के बावजूद भी यह कार्मिक कंवला में ही उपस्थिति देगा। ऐसे में जांच प्रभावित होने की संभावना है। इस मामले में ग्रामीणों ने आरोपित का मुख्यालय बदलने की मांग की थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
इनका कहना
पहले स्तर पर सहायक व्यवस्थापक को निलंबित किया गया है। कमेटी की ओर से मामले की गहनता से जांच की जाएगी। निलंबित कार्मिक को भी सुनवाई का मौका दिया जाएगा। जांच के बाद विभिन्न तथ्यों और बिंदुओं के आधार पर मामले की जांच कमेटी करेगी, जिसके बाद दोषी पाए जाने पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। वैसे ग्रामीणों ने कार्मिक का मुख्यालय बदलने की मांग जरुर की थी, लेकिन सहकारी समिति का मामला है, इसमें सीधे तौर पर ऐसा करना संभव नहीं होता है।
- ओमपालसिंह भाटी, एमडी, जेसीबीबी





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