दौसा. रोडवेज श्रमिक संगठनों की पिछली तीन दिवसीय चक्काजाम हड़ताल के बाद भी समझौते को लागू नहीं होने से आक्रोशित रोडवेजकर्मियों ने सोमवार को बस जाम कर दिया। इससे सवारियों को खासी परेशानी भुगतनी पड़ी। रोडवेज प्रशासन को एक दिन में करीब साढ़े चार लाख रुपए का राजस्व घाटा हुआ है। यहां से प्रतिदिन 65 शिड्यूल चलते हैं जिनमें से सोमवार को मात्र 7 ही बसें चल पाई है। वे भी भर्तहरि मेले के रूट पर ही चल पाई।
इधर, दौसा आगार में एटक अध्यक्ष हितेश जोशी, बीजेएमएस अध्यक्ष श्यामलाल परेवा के नेतृत्व में रोडवेज कर्मियों का जमावड़ा लग गया। 16 सितम्बर 2018 को रात 12 बजे से जाम हड़ताल में परिवर्तित हो गई। कर्मचारियों ने बताया कि 25, 26 व 27 जुलाई 2018 को परिवहन मंत्री की अध्यक्षता में संयुक्त कर्मियों में भारी आक्रोश है। रोडवेज कर्मियों ने प्रदर्शन करते हुए कहा कि अगले महीने लगने वाली आचार संहिता के कारण अबकी बार कर्मचारी आर-पार आंदोलन के मूड में है।
सभी कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि जब तक सातवें वेतनमान एवं भर्ती सहित समझौते की अन्य मांगों को लागू नहीं किया जाएगा तब तक जाम रहेगा।
निजी वाहनों में करनी पड़ी यात्रा
रोडवेज बसों की हड़ताल के कारण यात्रियों को निजी वाहनों में यात्रा करनी पड़ी। इससे इन अन्य दिनों खाली चलने वाली निजी बसों एवं जीपों में सवारियों को यात्रा करनी पड़ी। इधर रोडवेज बस स्टेण्डों पर सवारियां घंटों तक वाहनों का इंतजार करती रही। ऐसे में निजी बसों व जीपों की छतों पर भी सवारियां दिखाई दी।
बुलाना पड़ापुलिस जाप्ता
आगार प्रबंधक कैलाश चन्द मीना ने बताया कि कर्मचारियों ने पहले तो वर्कशॉप से बसों को निकालने का विरोध किया था, लेकिन बाद में पुलिस जाप्ता बुला लिया था। उनकी 7 बसें भर्तहरि मेले में चली। हालांकि ये रोडवेजकर्मी दावा कर रहे हैं कि सभी बसों का संचालन बंद रहा।
हड़ताल से निजी बसों की चांदी
लालसोट. रोडवेजकर्मियों की हड़ताल के चलते क्षेत्र में भी रोडवेज बसों का संचालन ठप रहा। सुबह से ही क्षेत्र के लालसोट से दौसा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी एवं जयपुर जाने वाले मार्गों पर यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। निजी बस संचालकों ने जमकर चंादी कूटते हुए मनमाना किराया वसूला।(नि.प्र)





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