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राजस्थान का रण: ना जीतने वालों ने सुध ली और ना ही हारने वालों ने मुंह दिखाया

सिरोही. चुनावी मैदान में पांच साल बाद एक बार फिर से नेता वादों और विकास के दावों को लेकर आदिवासियों के बीच पहुंचने की तैयारियों में जुट चुके हैं। लेकिन वर्ष2013 के चुनाव में आबू-पिण्डवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में जिस बूथ से भाजपा को सर्वाधिक मत मिले थे, ये गांव पहले भी पिछड़ा था और आज भी हालात जस के तस है। यहीं हाल उस क्षेत्र के भी हैं, जहां से कांग्रेस ने सर्वाधिक वोट हासिल किए थे। बीते पांच साल में दोनों ही दलों ने ऐसे काम नहीं किए जिन्हें गिनाया जा सके। राजस्थान पत्रिका ने आबू-पिण्डवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के दोनों मतदान केन्द्रों की हकीकत जानी, तो पता चला कि यहां के लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। जबकि, विधानसभा चुनाव में ज्यादातर मतदाता इसी उम्मीद में अपना प्रतिनिधि चुनते हैं, कि वह उनके बीच आएगा, उनकी पीड़ा सुनेगा, समस्याएं दूर करेगा। लेकिन पिछले चुनाव में वोटों और काम का गणित देखें तो जनता की उम्मीदें धराशायी ही हुई है।

जनता का विश्वास जीता और चल दिए...
मैं राजू जाणी आरफ्ता-आरफ्ता रविवार को सवेरे आबू-पिण्डवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के उस गांव के बूथ के ठीक सामने पहुंचा। जहां वर्ष2013 के चुनाव में भाजपा ने सर्वाधिक मत मिले थे। इस गांव के बूथ पर भाजपा को 743 मत मिले थे। पत्रिका संवाददाता को गांव में आया देख ग्रामीणों ने जेहन में छुपे दर्द को जाहिर करने में कोई देर नहीं की। इन चुनावों में भाजपा के समाराम गरासिया विधायक चुने गए, तो यहां के बाशिंदों की उम्मीदें भी दुगुनी हो गई, लेकिन पांच साल में जनता के हाथ में कोई खास सौगात नहीं आई। हालांकि, इस गांव में अधिकांश आदिवास मतदाता नजर आए। जिनसे सवाल-जवाब भी किए, लेकिन खुली जुबां से कोईबोलने को तैयार नहीं हुआ। गांव में एक दुकान के बाहर बैठे एक युवक ने कहा कि 'साहब! ना तो घरों में बिजली पहुंची है और ना ही सड़क की सुविधा है। बस, नेताजी हमारा वोट लेकर चले जाते हैं, लेकिन दुबारा लौटकर नहीं आते हैं।Ó जिस पर पत्रिका टीम ने गांव में घूमकर हकीकत को जांचा तो गलियों में गड्ढेनुमा ग्रेवल सड़क नजर आई। ना तो पानी निकासी को नालियां थी और ना ही अन्य मूलभूत सुविधाएं नजर आई। ऐसे में जाहिर है कि यहां से नेताओं ने जनता का विश्वास जीतकर सर्वाधिक वोट तो हासिल कर लिए, लेकिन जनता की उम्मीदों की झोली में कोई खास सौगात डालने में कोई रुचि नहीं दिखाई।

पलटकर ही नहीं आईं
पत्रिका टीम ने इसी विधानसभा क्षेत्र के फूलाबाई खेड़ा में भी वास्तविकता को जांचा। वर्ष2013 के चुनाव में यहां से कांग्रेस ने सर्वाधिक मत हासिल किए थे। इस गांव के बूथ पर कांग्रेस को 464 मत मिले थे। हालांकि, इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी गंगाबेन गरासिया हार गई थी। वहीं प्रदेश में कांग्रेस की सरकार भी नहीं बनी। ऐसे में कांग्रेस प्रत्याशी की ओर से किए गए वादें पूरे नहीं हो पाए। लेकिन यहां के ग्रामीणों का कहना है कि बूथ पर कांग्रेस को थोक में वोट दिए, लेकिन हारने के बाद प्रत्याशी पलटकर नहीं आईं। जो जीते, उन्होंने भी सूरत दिखाने में कंजूसी ही बरती।

वादों को पूरा किया
मोरस गांव में स्कूल क्रमोन्नत करने से लेकर हर संभव विकास कार्य करवाए गए हैं। मिसिंग लिंक रोड का निर्माण करवाया गया है। इसके अलावा गौरव पथ की भी स्वीकृति जारी की जा चुकी है। जिसका निर्माण कार्य जल्द ही शुरू करा दिया जाएगा। इसके अलावा अगर कोई छोटे-बड़े कार्य नहीं हो पाए हैं तो उन्हें भी पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा।
-समाराम गरासिया, विधायक आबू-पिण्डवाड़ा

क्षेत्र में जहां भी कार्यकर्ता बुलाते हैं, वहां पहुंच जाती हूं। फूलाबाईखेड़ा में भी पंचायतीराज चुनाव के समय गई थी। इसके अलावा भी कई बार कार्यकर्ताओं से मिलने जाती रहती हूं। क्षेत्र में जनता की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने का प्रयास किया है।
-गंगाबेन गरासिया, कांग्रेस प्रत्याशी

लोगों ने तय किया क्षेत्र विकास का एजेंडा
पोसालिया. विधानसभा क्षेत्र का विकास जनता की जरूरतों के अनुरूप हो, इसके लिए पत्रिका समूह ने जन-एजेंडा बनाने की कार्यवाही शुरू की है। इसके तहत रविवार को बाबा रामदेव मंदिर आजाद चौक पोसालिया में सिरोही विधानसभा क्षेत्र की बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें क्षेत्र के विकास को लेकर विभिन्न बिन्दुओं पर विचार मंथन किया गया। इस मौके वक्ताओं ने स्वच्छ राजनीति को लेकर पत्रिका समूह की ओर से चलाए जा रहे चेंजमेकर अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसा जनप्रतिनिधि हो जो छोटी से छोटी समस्या का समाधान कर सके और आमजन की समस्याओं को विधानसभा तक पहुंचाते हुए उनका निराकरण करने में तत्पर रहे। इस मौके चन्दनमल माली, पदमाराम कुम्हार, वरदाराम मीणा, हीरालाल माली, वीराराम कुम्हार, मंगल कुमार मीणा, नरसाराम सेन, सोहनलाल, मूपाराम मीणा, महेन्द कुमार छीपा, गिरीश कुमार माली मौजूद थे।



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