जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में झालाना सफारी, हाथी गांव, नाहरगढ़ जैविक उद्यान शुरू होने के बावजूद चिडिय़ाघर सैलानियों की पसन्द बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदारों का इस पर ध्यान नहीं है। सुविधाएं विकसित होना तो दूर, मौजूदा सुविधा-संसाधन की हालत भी खराब होती जा रही है।
रोजाना पहुंच रहे डेढ़-दो हजार सैलानी
चिडिय़ाघर में रोजाना डेढ़-दो हजार सैलानी पहुंच रहे हैं। यह संख्या आमेर महल के बाद सर्वाधिक है। इसके बावजूद यहां मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल की तो सामने आया कि गंदगी से भरे शौचालयों से नल-लाइट गायब हैं।
लोगों के लिए लगाए गए लॉकर का इस्तेमाल नहीं
बिजली के तार खुले पड़े हैं। पेयजल की भी समस्या है। सैलानी अल्बर्ट हॉल के सामने दूसरे हिस्से में जाकर टंकी का पानी पीने को मजबूर होते हैं। लोगों के लिए लगाए गए लॉकर का इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
प्लास्टिक पर रोक की पालना भी नहीं हो रही
लोगों की सुविधा वाली जगह पर गाडिय़ां पार्क की जा रही हैं। मुख्यद्वार पर जांच के लिए लगाई गई मशीन और द्वार के अंदर लगा कैमरा खराब है। प्लास्टिक पर रोक की पालना भी नहीं हो रही है।
कई पिंजरों पर लटका दिए ताले, खा रहे जंग
चिडिय़ाघर से बड़ी संख्या में वन्यजीव नाहरगढ़ जैविक उद्यान में शिफ्ट किए जा चुके हैं। ऐसे में कई पिंजरों पर ताले लटका दिए गए, जो अब जंग खा रहे हैं। यहां बना संग्रहालय भी बदहाल हो रहा है। हालांकि डीएफओ सुदर्शन शर्मा का कहना है कि ई-टायलेट सहित कई मूलभूत सुविधाएं हाल ही जुटाई हैं। समस्याएं जल्दी ही दूर कर दी जाएंगी।
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