भीलवाड़ा।
सोनी धर्मशाला में आयोजित धर्मसभा में आचार्य पदमभूषण रत्न सूरीश्वर ने कहा कि इंसान अंहकार से बचता है तो बड़ों की आज्ञा का पालन करता है। लेकिन आज का इंसान अंहकारी हो गया है। उसमें शहन शक्ति का अभाव हो गया है। इस कारण मानव स्वयं अपनी करनी का फल भुगत रहा है। मानव का चित्त शान्त नहीं होने से वह कई समस्याओं से जुझ रहा है। आचार्य ने बताया कि मेवाड़ देशोद्वारक आचार्य जितेन्द्रसूरी का तेरवां स्वर्गारोहण १० अक्टूबर मनाया जाएगा। इस दिन को आयम्बिल दिवस के रूप में मनाया जाएगा। मूर्ति पूजक संघ के प्रतिनिधि तेजसिंह नाहर ने बताया कि इस कार्यक्रम की तैयारियां की जा रही है।
गुरू के बिना निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल
भीलवाड़ा . प्राज्ञ भवन में आयोजित धर्म सभा में जैन मुनि रत्न प्रियदर्शन ने कहा कि व्यक्ति को अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने में धर्म और गुरु की आवश्यकता रहती है। जिसके जीवन में धर्म और गुरु नहीं है वह व्यक्ति अपने लक्ष्य तक पहुंचता है लेकिन मार्ग में कई बाधाएं आती है। मार्ग में कई भटकाव आते हैं। नींद चाहे कितनी ही गहरी हो लेकिन अलार्म हमें नियत समय पर उठा देता है और हम अपने कार्य की ओर अग्रसर हो जाते हैं। उसी प्रकार गुरु और धर्म हमें जगाता है। आगे बढ़ाता है और अपने कार्य को सुचारु करने में सहायता करता है। उन्होंने कहा की प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में अलार्म का होना आवश्यक है। जिस प्रकार मनुष्य नींद से जागने के लिए अलार्म का उपयोग करता है और अलार्म के बजते ही वह अपनी निद्रा को त्याग देता है उसी प्रकार जीवन में कर्म रूपी निद्रा से निजात पाने के लिए भी गुरू रूपी अलार्म का होना अति आवश्यक है। धर्म सभा को सौम्य दर्शन मुनि व विराग दर्शन मुनि ने भी सम्बोधित किया।
श्रमिकों के साथ मनाया नशा मुक्ति दिवस
भीलवाड़ा . मुनि सुखलाल एवं मुनि मोहजीत कुमार के सान्निध्य में अणुव्रत सप्ताह का नशा मुक्ति दिवस आईटीआई स्थित अंकुर फर्नीचर के प्रांगण में श्रमिकों के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सपना कोठारी ने अणुव्रत गीत से किया। समिति के संरक्षक पुखराज दक ने सभी का स्वागत किया। मुनि ने श्रमिकों को नशा के नुकसान के बारे में बताया और कहा की कैसे हम नशा छोड़ कर पैसों का और शरीर का बचाव कर सकते है। आभार समिति अध्यक्ष आनंद बाला ने किया। संचालन मंत्री अभिषेक कोठारी ने किया। इस दौरान उपाध्यक्ष लक्ष्मी लाल झाबक, सह मंत्री राजेश चोरडिया, नरेश कोठारी तथा मदनलाल उपस्थित थे।





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