कोटा. नगर निगम और नगर विकास न्यास की लापरवाही के कारण शहर के बगीचे उजड़ गए हैं। न पार्कों की सफाई हो रही और न झूलों की मरम्मत। बारिश का पानी भरने से ये तलैय्या बन गए हैं। बच्चे झूल तक नहीं सकते। निगम में सार्वजनिक क्षेत्र के पार्कों की देखरेख और विकसित करने के लिए करोड़ों रुपए का बजट फाइलों में बंद है। निगम एक साल से झूलों की मरम्मत तक नहीं करवा पा रहा है।
निगम के शहर में 250 से अधिक सार्वजनिक पार्क हैं। इसकी मरम्मत के लिए करीब 6 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान लिया हुआ है। लेकिन, छह माह बीत गए, अभी तक इस बजट का एक पैसा भी खर्च नहीं हुआ। कागजों में ही फाइलें इधर-उधर दौड़ रही हैं। पत्रिका टीम ने शहर के प्रमुख पार्कों में जाकर ग्राउण्ड रिपोर्ट देखी तो स्मार्ट पार्कों के दावे धूल चाटते ही दिखे। हालत यह कि ये पार्क घूमने लायक तक नहीं, कोई देखने वाला नहीं है।
& पार्कों के विकास व मरम्मत के लिए छह करोड़ का बजट स्वीकृत है। भीतरिया कुण्ड, चम्बल गार्डन समेत अन्य पार्कों के विकास कार्यों का प्रस्ताव लिया गया है। स्मार्ट सिटी में भी पार्क शामिल किए गए हैं। जल्द ही कार्य करवाए जाएंगे।
विनोद नायक, अध्यक्ष उद्यान समिति
चम्बल गार्डन : झूले टूटे तो समेटकर बांध दिए
चम्बल गार्डन के मनोरंजन जोन में लगे आधा दर्जन झूले टूटे पड़े हैं। उन्हें दुरुस्त करवाने के बजाए समेटकर बांध दिया गया है। इसी गार्डन में घूमने आने वाले लोगों को लुभाने के लिए बड़ा आकर्षक फव्वारा लगाया गया था, लेकिन उसकी मरम्मत तक नहीं हो पा रही। गंदा पानी भरा हुआ है।
गांधी उद्यान : झूला पट्टी ही गायब
गांधी उद्यान भी बदहाली का शिकार है। किसी झूले की रैलिंग तो किसी
की पट्टी ही गायब है। फिसल पट्टियां टूटी हुई हैं। इस कारण बच्चों के चोटिल होने की संभावना रहती है। डायनासोर जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गया है। भीतरियां कुण्ड के ज्यादातर फव्वारे टूटे पड़े हैं।
सीबी गार्डन : पानी भर गया, झूल नहीं सकते
न्यास के अधिकारियों का भी पार्कों की देखरेख के प्रति कोई ध्यान नहीं है। शहर के हृदय स्थल पर बने सीबी गार्डन में ही झूलों की सार-संभाल नहीं हो रही है। झूला जोन में बारिश का आधे से एक फीट पानी भरा हुआ है। स्थिति यह है कि यहां बच्चे झूल नहीं सकते। झूले भी टूटे हुए हैं।
मरम्मत कौन करेगा पता नहीं
निगम ने एक साल से पार्कों की मरम्मत का काम बंद कर रखा है। इस कारण एक बार झूला टूट गया तो वह दुरुस्त नहीं हो पाता है। वार्ड पार्षद विवेक राजवंशी ने बताया कि उनके वार्ड 54 के पार्कों में दो साल पहले लाखों रुपए खर्च कर विभिन्न तरह के झूले लगाए थे, लेकिन मरम्मत नहीं हो रही। मरम्मत कौन करेगा, इसका ही पता नहीं। हर साल मरम्मत के लिए ठेका दिया जाता था, लेकिन इस साल अभी तक दिया गया। पिछले दिनों कार्य समिति की बैठक में भी यह मामला उठा था।





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