जयपुर. कड़वे प्रवचन नाम से समाज और राष्ट्र के अहम मुद्दों पर तीखे शब्दों में अपनी राय देने वाले मुनि तरुण सागर का नई दिल्ली में शनिवार तड़के देवलोकगमन हो गया। शनिवार को शहर में चातुर्मास कर रहे है मुनियों और आर्यिका ने मुनि के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सटीक बातें समाज और इंसानियत को जगाते प्रवचन सबकी यादों में रहेंगे। संसार को त्याग कर 20 से अधिक दिगम्बर जैन संतो के सानिध्य में यूपी के मेरठ रोड स्थित गाजियाबाद के नजदीक मुरादनगर के तरुण सागरम तीर्थ पर जैन धर्म की रीति-रिवाजों के साथ पंचतत्व में विलीन हो गए। शहर में अतिशय क्षेत्र बाड़ा पदमपुरा स्थित जैन मंदिर की एयरपोर्ट की भूमि अवाप्ति के मामले में मुनि ने सरकार को बैकफुट ला दिया, मजबूरन सरकार को नक्शे में संशोधन करना पड़ा। पदमपुरा में समाज और व्यापारियों ने विनयांजलि सभा आयोजित की। वहीं जैन धर्मावलंबियों में भी शोक की लहर छा गई। विभिन्न मंदिरों में मुनि णमोकार महामंत्र पाठ हुए।
साक्षात्कार में दी थी युवाओं को नसीहत
जयपुर में सीस्कीम के प्रवास के दौरान पत्रिका से विशेष बातचीत में मुनि ने कहा था कि संतों को अब जनता के बीच प्रवचन नहीं करने चाहिए बल्कि राजनेताओं के लिए लोकसभा और विधानसभा में प्रवचन देना चाहिए। क्योंकि सबसे ज्यादा जरूरत यही है। मुनि ने कहा था कि जनता ४ साल तक नेताओं का ख्याल रखती है लेकिन नेता केवल चुनावी साल में जनता का ख्याल रखते हैं। वहीं युवाओं को नसीहत देते हुए कहा कि आज सब मोबाइल के टच में व्यस्त हैं, परिवार में एक-दूसरे से कोई टच नहीं है। युवाओं को परिवार के पास बैठकर संस्कारों का ज्ञान लेना चाहिए।
तीन बार आए मुनि तरुण सागर गुलाबीनगरी
मुनि के साथ जुड़े लोगों का कहना है कि गुलाबीनगरी में मुनि का तीन बार आगमन हुआ। वर्ष २०१४ में इतिहास में पहली बार दिगम्बर और श्वेतांबर संतों का मिलन होने के बाद भट्टारक जी की नसियां में चातुर्मास हुआ। वहीं २००१ में भी बड़ी चौपड़ पर मुनि ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। २०१८ में मुनि तकरीबन तीन महीने तक सीस्कीम सहित अन्य जगहों पर शहर में विभिन्न जगहों पर प्रवास किया।
साधु-संतों ने रखी अपनी-अपनी राय
मुनि तरुण सागर को युगों-युगों तक याद किया जाएगा। जैन धर्म में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा। मुनि ने अल्पायु में दीक्षा लेकर और अल्प आयु में समाधि मरण का इतिहास रच डाला।
-आर्यिका विमल प्रभा, महारानी फॉर्म
कड़वे प्रवचन के जरिए मुनि तरुण सागर ने जैन समाज ही नहीं अपितु जन-जन के दिलों में विशेष स्थान बनाया।
-मुनि विभंजन सागर, शास्त्रीनगर
मुनि तरुण सागर ने भगवान महावीर के अहिंसा के सिद्धांत को शंखनाद किया। मुनि हमेशा याद किए जाएंगे।
-आर्यिका विज्ञा श्री, मानसरोवर वरुण पथ
मुनि ने जैन समाज ही नहीं अपितु पूरे देश का नाम गौरवांवित किया है। कड़वे प्रवचनों के माध्यम से वो औषधि प्रदान की है जिसकी आवश्यकता प्रत्येक प्राणी को होती है।
-आर्यिका गौरवमति, जनकपुरी ज्योतिनगर
मुनि तरुण सागर पहले संत थे, जिन्होंने १३ साल की उम्र में घर त्याग दिया। समता भाव के साथ देश और समाज को एकता का महत्व दिया और एकता के साथ जुुड़े रहने का संकल्प दिया।
-मुनि निर्मोह सागर, बरकत नगर
प्रतिष्ठान रखे बंद
मुनि तरुण सागर के देवलोक गमन के बाद पदमपुरा प्रबंध कार्यकारिणी समिति द्वारा शोक सभा रखी गई। दोपहर तीन से शाम छह बजे तक समाजबंधुओं और व्यापारियों ने प्रतिष्ठान बंद रखकर मुनि को विनयांजलि पूर्वक श्रद्धा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। क्षेत्र के मानद मंत्री हेमंत सोगानी ने बताया की मुनि तरुण सागर महाराज के देवलोक गमन की सूचना मिलते ही पदमपुरा जैन समाज ही नहीं अपितु सर्व समाज में शोक की लहर दौड़ गई। इस दौरान अध्यक्ष सुधीर जैन, संरक्षक ज्ञानचंद झांझरी, उपाध्यक्ष सुरेंद्र पांड्या, संयुक्त सचिव सुरेश काला, सदस्य जितेन्द्र मोहन जैन, अखिल भारतीय दिगम्बर जैन युवा एकता संघ अध्यक्ष अभिषेक जैन, अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद जिला अध्यक्ष देवेंद्र बोहरा सहित अन्य समाज श्रेष्ठियों ने शामिल होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।





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