अश्वनी प्रतापसिंह @ राजसमंद. स्वछंद विचरण करने वाले वन्यप्राणियों को पिंजरे में कैद करना अब महंगा पड़ सकता है। वनविभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम १९७२ के तहत जिले में कार्रवाई शुरू की है। विभाग के कर्मचारी गली मोहल्लों में घूमकर वनप्राणियों को कैद से आजाद करवा रहे हैं, गत दिनों जिले के नाथद्वारा क्षेत्र में कार्रवाई कर विभाग ने कई तोते आजाद करवाए। अधिकारियों का कहना है कि वनप्राणियों को कैदकर पालना अपराध है, इसमें सजा के साथ तीन साल की कैद का भी प्रावधान है।
पक्षी आजाद करवाए, हिदायत देकर छोड़ा
डीएफओ फतेहसिंह राठौड़ ने बताया कि गत दिनों हमें नाथद्वारा में तोते पिंजरे में पालने की सूचना मिली। इस पर नाथद्वारा के गणेश टेकरी क्षेत्र से तोते आजाद करवाए, साथ ही पालने वाले को दोबारा नहीं पालने की हिदायत देकर छोड़ दिया। राठौड़ ने बताया कि लव बर्ड की प्रजातियों को पालने की इजाजत है। इन पक्षियों पर भी यदि कोई ज्यादती करता है, उन्हें दाना-पानी समय पर नहीं दिया जाता या बीमार होने की स्थिति में उपचार नहीं दिया तो भी अत्याचार अधिनियम के तहत संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज करवाने का प्रावधान है। राठौड़ का कहना है कि जिले में आगे भी इस तरह की कार्रवाई की जाएगी।
यह है नियम
राठौड़ ने बताया कि वन्य प्राणियों को पालते पाया गया तो उसके खिलाफ वाइल्ड लाइफ एक्ट 1972 की धारा 9, 3 व 51 के तहत मामला दर्ज किया जाता है। प्राथमिक चरण में विभाग तीन से चार हजार तक जुर्माना कर सकता है। जुर्माना नहीं भरने पर चालान काटकर मामला पर्यावरण अदालत में भेजा जाता है। ऐसे मामले में आरोपी को 25 हजार रुपये जुर्माना व सात साल की कैद तक हो सकती है।
जिले में तोता, कछुआ पालने का ज्यादा चलन
जिले में कई घरों में आज भी लोगों ने पिंजरे में तोते पाल रखे हैं, वहीं कुछ लोग कछुआ भी पालते हैं, नाथद्वारा, भीम क्षेत्र में पक्षियों की पालने की ज्यादा शिकायतें विभाग के पास आ रही हैं।





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