हिण्डोली क्षेत्र में कम बरसात से खाली रह गए जल स्रोत
हिंडोली. क्षेत्र के जल स्रोतों में बहुत कम पानी की आवक होने के बावजूद कई किसान बांधों की पेटा काश्त भूमि पर रबी की फसल की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले चालीस से पचास दिनों में ही जल स्रोतों का पानी रीतने की संभावना पैदा हो गई है। सूत्रों के अनुसार इस बार बरसात कम होने से क्षेत्र के बाध, तालाब, झील व एनिकटों में मामूली पानी की आवक हुई है। इनमें से कईबांध तो अभी तक रीते पड़े हैं। इसके बाद भी कई किसान बांधों की पेटा काश्त भूमि पर रबी की फसल की बुवाई के लिए हंकाई करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि झील, तालाब व बांधों में पानी काफी कम है। ऐसे में पेटाकाश्त पर फसल बुवाई करने वाले किसान जल स्रोतों से फसलों की सिंचाई के लिए पानी लेंगे। इन हालातों में दिसंबर माह तक जल स्रोत रीत जाएंगे। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पेटा काश्त भूमि पर फसल नहीं करने व जल स्रोतों में आए पानी की सुरक्षा करवाने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि रोक नहीं लगी तो आगामी गर्मी के मौसम में पशुओं व आमजन के लिए पीने के पानी की गंभीर समस्या पैदा हो जाएगी।
इन जल स्रोतों को है खतरा
हिंडोली क्षेत्र के गुढ़ा बांध, राम सागर बांक्या बांध, मेंड़ी, गोठड़ा, पेचकी बावड़ी, विजयगढ़, रुणीजा का खाल व मरडिय़ा सहित कई बांधों के पानी को बचाने के लिए समय रहते प्रशासन को प्रयास करने होंगे। नहीं तो आने वाले दिनों में सभी बांध खाली नजर आएंगे। जिससे आगामी दिनों में हालात विकट हो जाएंगे।
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इस बार बारिश कम होने से बांधों व जल स्रोतों में पानी की आवक कम है। लेकिन पेटा काश्त का काम राजस्व विभाग का है। जल संसाधन विभाग जल की व्यवस्था देखेगा।
जंबू कुमार जैन, सहायक अभियंता जल संसाधन विभाग हिंडोली।
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इस बार पानी की गंभीर समस्या के चलते अतिक्रमियों को पेटाकाश्त की भूमि पर फसल करने से रोका जाएगा। जरूरत पड़ी तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
केसरी सिंह, नायब तहसीलदार हिण्डोली.





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