गढमोरा. करौली जिले के गढमोरा कस्बे को राजा मोरध्वज की नगरी के रूप में पहचाना जाता है। यहां हजारों साल पहले के निर्मित महल, मंदिर और कुण्ड इतने आकर्षक तरीके से बनाए हुए हैं, वे पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेते हैं। इस कस्बे में तथा आसपास पर्यटन की दृष्टि से अनेक ऐतिहासिक स्थल हैं लेकिन प्रचार के अभाव में यहां पर्यटकों की आवक कम ही होती है। सरकार का भी इन स्थलों के रख रखाव की ओर ध्यान कम ही रहा है। हालांकि अब सरकार ने भी इन स्थलों के विकास के लिए दो करोड़ रुपए मंजूर कर लिए हैं। गढमोरा में राजा मोरध्वज के महल, बुद्ध मंदिर , प्राचीन गोपाल मंदिर , रानी के महल आकर्षण का केन्द्र हैं। राज्य के विभिन्न स्थानों से इन स्थानों को देखने के लिए वे ही लोग पहुंचते हैं जो यहां के इतिहास के जानकार है या स्थानीय लोगों से सुनते रहे हैं। रतन कंवर की शिला, प्राचीन हनुमान मंदिर ,पवित्र कुंड ,पदमा बाई के महल,नारायणी माता का मंदिर, भगवान देवनारायण का मंदिर पर भीड़ उमड़ती है। यहां पर कार्तिक मास में भरने वाले में हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
पर्यटकों की
बढेगी संख्या
राज्य सरकार ने गढमोरा ऐतिहासिक महत्व को देख दो करोड़ रुपए की राशि मंजूर की है। इश राशि से राजा मोरध्वज के महलों का जीर्णोद्धार करवाया जाएगा यहां पर पवित्र राजा के महल बुद्ध मंदिर, रानी का महल आदि का संरक्षण भी किया जाएगा। जिससे इन स्थानों पर पर्यटक अधिक संख्या में आ सके।
शिविर में योग का बताया महत्व
सूरौठ. ञ्च पत्रिका. कस्वे के पतंजलि योगपीठ व भारत स्वाभिमान के तत्वावधान में निशुल्क पांच दिवसीय योग शिविर में लोग योगाभ्यास कर बिना दवा के रोगोपचार करने व स्वस्थ रहने के गुर सीख रहे हैं।
शिविर में पंतजलि के जिला योग प्रचारक सुनील कारपेंटर द्वारा योगक्रियाओं के जरिए मोटापा दूर कर व डायबिटीज को नियंत्रित करने के तरीके बताए जा रहे हैं। सुबह पांच बजे डॉ. प्रभूदयाल सिंघल की बगीची में डॉ. सिंघल व पतंजलि जिला प्रभारी पृथ्वी लाल मीणा दीप प्रज्वलित कर योग शिविर का शुभारंभ किया। दो पारियों में लग रहे शिविर में सुबह व शाम लोगों को रोग के अनुसार योग का अभ्यास कराया जा रहा है।





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