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मैं तो स्कूल जाऊंगा दूध पीकर आऊंगा...

पाली। नानी के घर जाऊंगा दूध-मलाई खाऊंगा... यह कविता अब पुरानी हो गई है। इन दिनों सरकारी स्कूल के बच्चे मैं तो स्कूल जाऊंगा दूध पीकर आऊंगा...। कविता गाकर माता-पिता से स्कूल जाने का कहते हैं। यह हुआ है सरकार की ओर से जुलाई में शुरू अन्नपूर्णा दूध वितरण योजना शुरू करने से। योजना शुरू करने पर सप्ताह में महज तीन दिन बच्चों को दूध पिलाया जा रहा था, लेकिन एक सितम्बर से दूध वितरण की व्यवस्था सप्ताह में छह दिन कर दी गई है। अब रविवार को अवकाश के दिन स्कूल की छुट्टी होने पर ही बच्चों को दूध नहीं पिलाया जाएगा।

दामों में नहीं किया बदलाव
अन्नपूर्णा दूध योजना शुरू करने पर गांवों में 35 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से राशि स्कूलों को दी जाती थी। जबकि शहरों में 40 रुपए प्रति किलोग्राम दूध के दाम दिए जाते थे। यह राशि अब भी दी जाएगी। अन्तर सिर्फ इतना है कि पहले माह में 12 से 15 दिन दूध पिलाने की राशि का भुगतान किया जाता था। जबकि अब 24 से 25 दिन दूध पिलाने में खर्च होने वाली राशि दी जाएगी।

शहरों में तय थे तीन दिन
बच्चों को दूध पिलाने के लिए शहरों में पहले तीन दिन तय थे। शहर के हर आठवीं तक के स्कूल में सेामवार, बुधवार व शुक्रवार को दूध पिलाया जाता था। जबकि गांवों में शिक्षकों को अपनी तरफ से सप्ताह में कोई भी तीन दिन तय कर दूध पिलाने के निर्देश थे। अब सभी जगह सप्ताह में छह दिन दूध पिलाया जाएगा

- अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत एक सितम्बर से सभी स्कूलों में दूध सप्ताह में छह दिन पिलाने के निर्देश जारी कर दिए है। कुछ स्कूलों में दो सितम्बर को रविवार व सोमवार को जन्माष्टमी का अवकाश होने से मंगलवार से सभी जगह दूध का वितरण शुरू हो जाएगा।
दिलदार अली सोलंकी, जिला प्रभारी, मिड-डे-मील, पाली



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