जयपुर। जयपुर विद्युत वितरण निगम सहित अन्य विभागों में सेवाएं मर्ज (आमेलित) का मामले ने तूल पकड़ लिया है। नियमों के विपरीत हो रहे इस मर्जिंग में अभियंताओं के विरोध के बाद उर्जा राज्य मंत्री व नगरीय विकास मंत्री दोनों सक्रिय हो गए हैं। मुख्य सचिव से भी हकीकत पता लगाने के लिए कहा गया है। इसके बाद ही स्थिति साफ होगी। पिछले दिनों हुई अथॉरिटी की मीटिंग में जयपुर विद्युत वितरण निगम के सहायक अभियंता गोपाल मिश्रा की सेवाएं मर्ज करने का एजेंडा ले जाया गया था, जिस पर मुहर लगाने की तैयार भी थी लेकिन एनवक्त पर अभियंताओं के विरोध में आने और मंत्री को इसकी जानकारी देने के बाद इसे रोक दिया गया। हालांकि, मिश्रा मंत्री और उच्चाधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। इस एजेंडे के बाद विद्युत वितरण निगम के ही अधीक्षण अभियंता भी सक्रिय हो गए हैं और मर्जिंग कराने की तैयारी कर रहे हैं। इकेन अलावा अन्य विभागों के अफसर भी जुटे हुए हैं। उधर,जयपुर डिस्कॉम के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक आर.जी. गुप्ता पहले ही कह चुके हैं कि मर्जिंग के आदेश देने वाले संबंधित विभाग को इसकी जांच करनी चाहिए थी।
इसके बाद मचा बवाल..
विद्युत वितरण निगम के सहायक अभियंता की सेवाएं सीधे जेडीए में मर्ज कर दी गई। जयपुर डिस्कॉम की ओर से एनओसी देने के बाद नगरीय विकास विभाग ने यह आदेश जारी किया। इसके लिए राजस्थान सेवा नियम का हवाला दिया गया, जबकि यहां यह नियम लागू नहीं है। हालांकि, इस आदेश में यह अंकित है कि मिश्रा डिग्रीधारी सहायक अभियंता (विद्युत) से कनिष्ठ होंगे।
स्थगन आदेश का हवाला..
आपत्ति कर रहे कर्मचारियों ने दावा किया है कि हाईकोर्ट का 22 जून, 2005 का स्थगन आदेश आज भी प्रभावी है। इसमें ऐसे ही एक मामले में स्थगन लिया गया है, जिसके बाद एक अन्य अभियंता की सेवाएं मर्ज करने से रोक दी गई थी। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को भी है, लेकिन चुनावी से ठीक पहले सब कुछ करने की ठान रखी है। अब मुख्य सचिव इस मामले में जांच कर रहे हैं।
यह है नियम...
किसी भी अभियंता को न्यूनतम पद (कनिष्ठ अभियंता) पर आमेलित (मर्ज) किया जा सकता है एवं आमेलित अभियंता से से कनिष्ठ होगा।





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