Breaking News
recent

गोल लौकी से मालामाल हो रहा सीकर का किसान, जानिए इसकी खासियत

सीकर. देसी बीज से तैयार गोल लौकी को भले ही नई पीढ़ी भूल चुकी है, लेकिन कोलिड़ा के किसान ओमप्रकाश शर्मा ने इसे बाजार में फिर से उतारने की तैयारी कर ली है। किसान का दावा है रसायनों से बेस्वाद हो चुकी हाइब्रिड घीया को देसी बीज से तैयार गोल लौकी मात देगी। खास बात ये होगी कि स्वाद के साथ ही विदेशी बीजों की तुलना में आठ गुना अधिक उत्पादन देगी। अधिक टिकाऊ होने के कारण किसान इसका परिवहन कर प्रदेश की दूर दराज की मंडियों में बेच पाएंगे। जैनेटिक गुण होने से गोल लौकी में रोग-प्रतिरोधक क्षमता अधिक है। इससे लोगों को बेस्वाद हो रही हाइब्रिड लौकी से निजात मिलेगी।

हर अंकुरण पर तैयार होती है बेल

एक बीज से तैयार लौकी के बीज से कई बेल तैयार हो जाती है। हाइब्रिड लौकी तुलना में गोल लौकी की बेल पर छह माह तक फल लगते हैं। राधाकिशनपुरा के किसान मूलचंद सैनी ने बताया कि गोल लौकी की जड़ों में कइ गांठ होती है। जो जमीन पर अंकुरित होकर नई जड़ तैयार कर लेती है। अंकुरण वाले स्थान पर देसी खाद और सिंचाई करने पर यह अलग रूप से विकसित होती है। इस कारण एक बेल से उत्पादन ज्यादा मिलने लगता है।

 

होटलों में सलाद में प्रयुक्तगोल लौकी उत्पादन के साथ स्वाद में भी बेहतरीन होता है। जैविक खाद देने से बडे होटलों में इसे सलाद के रूप में काम लिया जाता है। हाइब्रिड घीया की तुलना में इससे 25 प्रतिशत ज्यूस ज्यादा निकलता है। कई चिकित्सक तो गोल लौकी के ज्यूस को प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला बताते हैं।

इनका कहना है

देसी व परम्परागत गोल लौकी पोष्टिक होने के साथ अधिक उत्पादन देती है। टिकाऊ होने के कारण वजन अधिक होता है। देसी बीज होने के कारण इसमें रसायनिक खाद नहीं दिया जाता है।

हरलाल सिंह, उपनिदेशक उद्यान खंड सीकर



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.