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मोदी और मनमोहन में ये खास रिश्ता, आप भी जानिए

नई दिल्ली। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए में लगातार गिरावट देखी जा रही है। गुरुवार को रुपया अबतक के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। गुरुवार के कारोबारी सत्र में रुपए की गिरावट बढ़कर 72.12 प्रति डॉलर पर जा पहुंची है । लेकिन आप सोच रहे होंगे कि आखिर रुपए की बात में मोदी और मनमोहन का क्या काम। तो आपको बता दें कि साल 2013 में जब मनमोहन सिंह की सरकार थी तब भी रुपए की हालत कुछ ऐसी ही हो गई थी। और मनमोहन सरकार की एक गलती के कारण रुपए की गिरावट लगातार बढ़ती चली गई। आज दौर फिर एक बार अपने आप को दोहरा रहा है। ऐसे में मोदी सरकार को वहीं गलती नही दोहराने चाहिए यूपीए में की गई थी। आइए आंकड़ों के जरिए जानते हैं पूरी हकीकत…

साल 2013 में हुआ था ये हाल

2 जनवरी 2013 को रुपया डॉलर के मुकाबले 54.24 पर था जो 3 सितंबर को 67.635 तक आ गिरा था।वहीं साल 2013 में फरवरी से अगस्त के बीच रुपया 23% टूट गया था। जबकि 2018 में जनवरी से सितंबर के बीच रुपया 11% टूटा है। वित्तीय घाटे की बात करें तो मनमोहन सरकार के राज में साल 2013 में वित्तीय घाटा जीडीपी का 4.8% था। जो अब 2018 में यह 3.5% के आसपास है पहुंच चुका है। 2013 में फरवरी से अगस्त के बीच कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत औसतन 107 डॉलर प्रति बैरल से कम थी। 2018 में जनवरी से सितंबर के बीच यह औसतन 75 डॉलर प्रति बैरल रही। 2013 में सितंबर के पहले सप्ताह तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 285 अरब डॉलर था। अभी विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 415 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। आंकड़ों को देखने से साफ पता चलता है कि रुपए ने पीएम मोदी और पूर्व पीएम मनमोहन में एक खास रिश्ता जोड़ दिया है। हालांकि मनमोहन रुपए से पार पाने में विफल रहे थे। लेकिन देखना होगा कि पीएम मोदी इससे पार पाते है या फिर मनमोहन सिंह की तरह ही विफल हो जाते हैं।



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