जालोर. शहर स्थित बड़ा स्थानक में गुरुवार को संवत्सरी महापर्व के तहत महाश्रमणी साध्वी पुष्पवती ने कहा कि क्षमा व्यक्ति को महान बनाती है। तप साधकों को संबोधित करते हुए उपप्रवर्तिनी राजमती ने कहा कि क्षमा धारण करने वाला शक्तिमान होता है। मन की दृढ़ता क्षमा की कसौटी है।
निर्बल की क्षमा भी शस्त्र के समान होती है। क्षमा शुक्लध्यान का आलम्बन है और क्षमावान व्यक्ति क्रोध को जीत लेता है। साध्वी डॉ.राजरश्मि ने कहा कि क्षमा का आशय मन-मस्तिष्क को पूरी तरह से स्वच्छ करना है। मन में यदि विरोध रखकर ऊपरी तौर पर क्षमा मांग भी ली जाए तो वह वास्तविक क्षमा नहीं है। वास्तविक क्षमा तो हृदय की निष्कपटता है। साध्वी राजऋद्धि ने कहा कि सम्भाव रखकर प्राणी मात्र को क्षमा करनी चाहिए। वहीं सभी जीवों के प्रति मैत्रीभाव रखना चाहिए। जैन धर्मकी क्षमा उत्तम है। सांसारिक व्यवहार में किसी से कड़वे शब्द निकल जाते हैं और कलह-क्लेश भी हो जाता है तो क्षमापना कर लेने से आत्मा शुद्ध हो जाती है। इस दौरान कईश्रावक-श्राविकाओं ने उपवास व पौषध व्रत की आराधना की।
इस मौके बाबूलाल चत्तरगोता, अनिल धारीवाल, भंवरी बाई चौधरी के आठ उपवास पर प्रत्याख्यान हुए। इस दौरान कई लोगों ने उपवास किया। तपाभिनंदन करत हुए संघ के पदाधिकारियों ने सात्विक हर्ष पूर्वक अनुमोदना की। धारीवाल ने तपस्या को आगे बढ़ाते हुए एक साथ 14 उपवास के प्रत्याख्यान रखे। कई महिलाओं ने तपस्या का संकल्प लेकर तपसाधकों का बहुमान किया। साध्वी राजलक्षि, राजवृद्धि, राजकीर्ति व अन्य ने भी गीतिका के माध्यम से संवत्सरी पर्व पर क्षमाधर्म का महत्व बताया।
भीनमाल. शहर के गणेश चौक स्थित आराधना भवन जैन धर्मशाला परिसर में चल रहे चातुर्मास के दौरान पर्वाधिराज पर्युषण के अंतिम 8 वें दिन गुरुवार को क्षमा याचना के साथ संवत्सरी पर्व मनाया गया।
जैन मुनि प्रसन्न देव विजय ने अपने नियमित प्रवचन में बारसा सूत्र का श्रवण कराते हुए चौबीस तीर्थकरों के जीवनी का उल्लेख किया। धर्मशाला प्रांगण में सुबह बारसा सूत्र वोहराया गया। चातुर्मास के प्रवक्ता माणकमल भण्डारी ने बताया कि सांवत्सरिक प्रतिक्रमण किया गया। एक-दूसरे से क्षमा याचना की गई। पर्युषण पर्व के दौरान सभी तपस्या करने वाले आराधकों का शुक्रवार को भव्य बहुमान किया जाएगा। कहा कि माफ करना या सहन करना। अपनी भूल के लिए क्षमा मांगना तथा औरों की भूल के लिए क्षमा करना। इस दोनों का सम्मिलित रूप है क्षमा याचना। भूल होने पर उसी समय क्षमा मांगना उचित है, परन्तु यदि किसी कारण वश उसी समय क्षमा नहीं मांगी जा सके तो सांवत्सरिक पर्व पर बारह महीनों में एक बार सभी भूलों के लिए क्षमा अवश्य मांग लेनी चाहिए। क्षमा याचना करने से मन हल्का हो जाता है।
बालवाड़ा. कस्बे की जैन धर्मशाला में चल रहे आठ दिवसीय पर्युषण महापर्व का गुरुवार को समापन हुआ। पर्व के अंतिम दिन धर्मशाला में कई कार्यक्रम हुए। दोपहर को न्याति नोहरे में संवत्सरिक प्रतिक्रमण का आयोजन हुआ। जिसमें जैन समाज के लोगों ने वर्षभर में जाने-अंजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना की। इससे पहले बुधवार को 12०० कल्पसूत्र का समापन हुआ। शुक्रवार को अलसुबह गाजेबाजे के साथ मंदिर का द्वार खोलकर दर्शन लाभ लिया जाएगा। इस मौके ऊकचंद, अशोककुमार, पारसमल, टेकचंद, महेंद्रकुमार, सकचंद, कमलेशकुमार, शांतिलाल, दलीचंद, बाबूलाल, संघवी भंवरलाल, भरतकुमार व ललितकुमार सहित जैन समाज के कई लोग मौजूद थे।
गुड़ा बालोतान (आहोर). कस्बे समेत क्षेत्र में गुरुवार को क्षमापना के साथ पर्युषण महापर्व का समापन हुआ। पर्व के अंतिम दिन विविध धार्मिक आयोजन हुए। जिसमें श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर जिनेन्द्र भगवान की वंदना की। गुड़ा बालोतान समेत गांवों में सवंत्सरी प्रतिक्रमण के पश्चात क्षमा याचना के साथ जैन समाज के पर्युषण महापर्व का समापन हुआ। संध्या- आरती, मंगल दीवा, रात्रि संगीतमय, प्रभु जिनेन्द्र भक्ति एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसमें समाज के लोग झूमते नजर आए। इसी तरह हरजी, थांवला, दयालपुरा में जैन पर्युषण महापर्व का समापन हुआ। इस अवसर पर सुरेश जैन, किर्ती जैन, दुर्गेश जैन, चम्पालाल दौलानी, ललित जैन, सांकलचंद, शांतिलाल, प्रकाश जैन, रमेश जैन समेत श्रावक श्राविकाएं मौजूद रहे।
सियाणा. पर्युषण पर्व के समापन को लेकर गुरुवार को वरघोड़ा निकाला गया। जैनमुनि अमृतरत्न विजय व जिनरत्न विजय महाराज का सान्निध्य रहा। ओसवालों की धर्मशाला से रवाना होकर सदर बाजार होते हुए सुविधिनाथ जैन मंदिर पहुंचे। यहां धर्मसभा में बारसासूत्र का वाचन किया गया। बुधवार रात भक्ति कार्यक्रम में किशोर, र्कीति, महेन्द्र जैन ने प्रस्तुति दी।प्रतापचंद, पुखराज, दीपचंद, उत्तमचंद, भरत, देशमल, प्रदीप बाफना, नेनमल, भरत महात्मा समेत जैन समुदाय के कई लोग मौजूद थे।





No comments:
Post a Comment