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जन एजेंडा में शहरवासियों ने उठाए ज्वलंत मुद्दे

वर्ष 2018-23 का एजेंडा किया तैयार
समस्याओं पर मंथन
पाली. विधानसभा क्षेत्र पाली की प्राथमिकताओं और आवश्यकता के अनुरूप विकास करने के उद्देश्य को लेकर बुधवार को रोटरी क्लब में बैठक आयोजित की गई। जिसमें २०१८-२३ के लिए जन एजेंडा तैयार किया गया। शहर के प्रबुद्धजनों और चेंजमेकर्स ने ज्वलंत समस्याओं पर मंथन किया और क्षेत्र के भविष्य की तस्वीर पेश करते हुए उपयोगी सुझाव दिए। बैठक के दौरान सभी वक्ताओं ने राजनीति में स्वच्छता के लिए शुरू किए गए पत्रिका अभियान की सराहना की।
उन्होंने दिशाहीन हो रही राजनीतिक व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि इसके दुष्परिणाम समाज और देश को भुगतने पड़ रहे हैं। सभी ने पाली के प्रदूषण की समस्या को भी गंभीर माना। उन्होंने स्वीकार किया कि इच्छाशक्ति के अभाव में यह समस्या बरसों से बनी हुई है। सभी शहर के विकास के लिए अच्छे जनप्रतिनिधि का चुनाव करने का संकल्प किया।

 

शहरवासियों ने इनकी बताई आवश्यकता, प्रदूषण का मामला भी उठा, वर्तमान राजनीति को बताया दिशाहीन


सुमित्रा जैन : शहर के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थाओं की आवश्यकता है। बंजर हो चुकी किसानों की जमीनों को दोबारा से विकसित करने की आवश्यकता है।
मांगीलाल गांधी : बांगड़ अस्पताल में पहुंचने वाले अधिकांश मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। यह व्यवस्था ठीक नहीं हैं, इसमें सुधार होना चाहिए। प्रदूषण की समस्या का समाधान होना चाहिए। पाली में कपड़े के अलावा भी अन्य प्रकार के उद्योग विकसित किए जाने चाहिए।

पीएम जोशी : वर्तमान राजनीति दिशाहीन हो गई है। आजादी के बाद से अब तक शिक्षा, चिकित्सा, भोजन और आवास का प्रबंध करने में भी सरकारें नाकाम रही है। राजनीति को सही रास्ते पर लाने की आवश्यकता है। इसके लिए चेंजमेकर्स बदलाव के नायक के रूप में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।

वसीम रमजान खोखर : राजनीति में युवाओं की भागीदारी बढ़ानी चाहिए तथा एक उम्र निश्चित करनी चाहिए। युवाओं को ज्यादा से ज्यादा अवसर दिया जाना चाहिए।

नरेश माली : सिटीजन चार्टर लागू किया गया है, लेकिन इसकी पालना शत प्रतिशत नहीं हो रही। आम व्यक्ति को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती। सिटीजन चार्टर पर सख्ती से अमल होना चाहिए।
दीपक सोनी : शहर में बिजली के तार झूल रहे हैं। बारिश के दिनों में घरों में करंट फैल जाता है। यह समस्या आम है। मवेशी भी शहरवासियों के लिए बड़ी समस्या है। इसके निराकरण के लिए ठोक कदम उठाए जाने चाहिए।
यशपालसिंह कुम्पावत : पाली की इण्डस्ट्री में सुधार होना चाहिए। बांगड़ अस्पताल को रेफरल से बचाने की जरूरत है। लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए मतदान शत प्रतिशत हो, इसके लिए सभी को जागरूकता बढ़ाने में भागीदारी बनना चाहिए।
राजेन्द्रसिंह राजपुरोहित : बांगड़ कॉलेज में एमएससी संकाय जल्द खुलना चाहिए, ताकि छात्रों को अन्यत्र नहीं जाना पड़े। इसके अलावा कॉलेज में व्याख्याताओं की कमी है। वह भी पूरी होनी चाहिए।
जूंझारसिंह जोधा : किसानों की समस्याएं यथावत है। फसलों की खरीद की गई, लेकिन भुगतान की व्यवस्था सुचारू नहीं होती। किसान अब भी पैसों के लिए भटक रहे हैं। बांगड़ अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। इसकी नियुक्ति शीघ्र होनी चाहिए।
सूरज राठौड़ : रोजगार के अभाव में शहर के युवा पलायन कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराए जाने चाहिए। विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार उत्पन्न करने की बेहद आवश्यकता है। पाली में इसकी पर्याप्त संभावनाएं है।
वैभव भंडारी : प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए सीएसआर फण्ड का उपयोग किया जाना चाहिए। बांगड़ कॉलेज को यूनिवर्सिटी का दर्जा देकर पाली को शिक्षा का हब बनाया जा सकता है। सिलिकोसिस के रोगी बढ़ रहे हैं। इसके उपयोग की पर्याप्त व्यवस्था करने की जरूरत है।
नरेश बोहरा : बांगड़ कॉलेज में २० साल से एमएससी संकाय की मांग उठाई जा रही है, लेकिन अभी तक एमएससी स्वीकृत नहीं हुई। टेक्सटाइल विषय को पाली में महत्व दिए जाने की आवश्यकता है।
धनराज लोहार : योजनाओं का क्रियान्वयन नाम मात्र हो रहा। पर्याप्त संख्या में बेरोजगारों को बैंकों से लोन नहीं मिल रहा। जबकि जिला उद्योग केन्द्र से स्वीकृति मिल जाती है। इसमें सरकार को पूरी मॉनिटरिंग करनी चाहिए।
किशोर सोमनानी : शहर मे मूलभूत सुविधाओं की दरकार है। जब तक मूलभूत सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई जा सकती, विकास की बात बेमानी होगी।
कार्तिकसिंह : युवाओं को पर्याप्त अवसर दिए जाने चाहिए। युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार की उपलब्धता के लिए भी प्रयास जरूरी है।
राकेश पंवार : पाली में प्रदूषण की समस्या लम्बे समय से है। इसका समाधान होने से ही शहर का सही मायने में विकास होगा। चाइल्ड लेबर की समस्या को मिटाने की भी आवश्यकता है।
गणपत पटेल : फैक्ट्रियों का रंगीन पानी नदी में बहाकर किसानों के खेतों में नहीं पहुंचाना चाहिए। इसके लिए सख्ती की जरूरत पड़े तो वह भी करनी चाहिए। किसानों के हितों की रक्षा अवश्य करनी चाहिए।
नीलम बिड़ला : पाली को शिक्षा का हब बनाना चाहिए। जयपुर-दिल्ली के लिए पर्याप्त संख्या में टे्रन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। अस्पताल में सुविधाओं और संसाधनों की कमी पूरी
होनी चाहिए।



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