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भर दी वोटों से झोली फिर भी विकास में रहे कंगाल

गुढ़ाचन्द्रजी.ञ्च पत्रिका. अनुसूचित जनजाति के लिएआरक्षित टोडाभीम विधान सभा क्षेत्र में गढ़ी गांव के बूथ १४८ पर पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को सर्वाधिक मत मिले लेकिन बावजूद इसके ये गांव विकास के मामले में कंगाल रहा है। नादौती तहसील में ग्राम पंचायत बाडा राजपुर से दो किलोमीटर दूर स्थित गढ़ी गांव में कुल ३८८ मतों में से ३६३ वोट (९३ प्रतिशत) भाजपा प्रत्याशी रामराज मीणा के पक्ष में डले थे। वो चुनाव तो नहीं जीत पाए लेकिन उनके दल की सरकार जरूर बन गई। सत्ता में आने पर भी भाजपा के लोगों ने इस गांव की समस्याओं का समाधान नहीं कराया और विकास को अनदेखा ही किया। यहां के बाशिंदे बिजली-पानी, सडक़ जैसी मूलभूत जरूरतों को तरस रहे हैं। उनको पीड़ा है कि मतदान में भरपूर वोट देने पर भी सत्ता में आई भाजपा सरकार ने इस गांव की सुध नहीं ली। उनको यह भी मलाल है कि सबसे ज्यादा मत देने पर भी भाजपा से पराजित प्रत्याशी पांच साल में गांव में धन्यवाद देने भी नहीं आया। ग्रामीणों का कहना है कि राजपूत व बैरवा जाति बाहुल्य गांव में इससे पहले के चुनाव में भी एक राय होकर भाजपा को अच्छे मत मिलते रहे हैं।
ये हैं समस्याएं
गांव में पानी की समस्या जटिल है। एक दशक पहले भाजपा के विधायक रहे बत्तीलाल मीणा ने गांव में नलकूप लगवाया, लेकिन जलस्तर नीचे चल जाने से वह नकारा हुआ है। गांव के लोगों को चिकित्सा सुविधा के लिए १५ किमी दूर गुढाचन्द्रजी जाना पड़ता है। गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में मात्र तीन ही शिक्षक है। बैरवा बस्ती के लिए कच्चा रास्ता है। बारिश के दिनों में रास्ते में परेशानी आती है।
चुनाव बाद नहीं दिखती शक्ल
अर्जुन सिंह राजपूत का कहना है कि गांव का विकास भाजपा और कांग्रेस दोनों ही शासनों में नहीं हुअ। चुनाव के समय प्रत्याशी वादे तो कर जाते, लेकिन लेकिन फिर जीत या हार वापस आकर गांव के लोगों की सुध नहीं लेते।
नहीं किया कोई खर्च
प्रमोद सिंह का कहना है कि हमारे बूथ पर अब तक भाजपा के ही पक्ष में सर्वाधिक मतदान होता रहा है। पिछले चुनाव में तो रिकार्ड मत देने के बावजूद भाजपा ने गांव में धेला भी खर्च नहीं किया। यहां पर जीतने के बाद भाजपा विधायक बत्ती लाल के सिवाय कोई भी नहीं आया। तभी गांव में नलकूप लगाया था, जिसका पानी हम आज भी पी रहे हंै।
सडक़-पेयजल समस्या बरकरार
भौती बैरवा का कहना कि हमारी बस्ती का रास्ता कई वर्षों से कच्चा है। पेयजल की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। बारिश के दिनों में मरीज व गर्भवती महिलाओं को चारपाई से मुख्य सडक़ तक पहुंचाना पड़ता है। आज तक कांग्रेस व भाजपा ने रास्ते में एक पत्थर तक नहीं लगाया।


ढंडकापुरा में पानी व बदहाल सडक़ से परेशान ग्रामीण
नादौती. टोडाभीम विधानसभा क्षेत्र में ग्राम पंचायत मेढेकापुरा के गांव ढण्डकापुरा में कच्चे रास्ते हैं। विद्यालय में अपर्याप्त भवन को लेकर बच्चे परेशान हैं। गांव की जलयोजना का पानी वर्षाे बाद भी गांववासियों को मुहैया नहीं हो पाया है। ऐसी अनेकों समस्याओं से त्रस्त ढण्डकापुरा गांव में विकास की बहुतेरी गुंजाइश है। लगता ही नहीं कि यहां विकास की कोई किरण पहुंची हो। ग्रामीणों की शिकायत है कि पिछले ५ वर्ष में सरकार ने यहां समस्याओं को अनदेखा किया और विकास की सुध नहीं ली। इसका कारण भी वो खूब जानते हैं। खुद कहते हैं कि उनके गांव ने पिछले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम महर के पक्ष में भरपूर मतदान किया। ऐसे में भला भाजपा सरकार ने उनके यहां काम क्यों कराएगी। उनको दर्द है कि विधायक ने अपने फंड से सडक़ की समस्या का समाधान कराने में कोताही बरती। वर्ष २०१३ के चुनाव में ढण्डकापुरा के मतदान केद्र संख्या २२८ पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम को कुल ६८७ मतों में से ६८२ मत मिले थे। यानी ९९ प्रतिशत से अधिक मतदान कांग्रेस के पक्ष में हुआ।
ये बोले ग्रामीण
गांव के महाराम पटेल ने बताया कि वर्तमान विधायक उनके सुख: दु:ख में सदैव उनके बीच रहते है। गांव में बुनियादी सुविधाएं नहीं होने से आमजन त्रस्त है लेकिन इसमें सरकार को दोष है। विधायक तो विपक्ष में है।
हिम्मत सिंह गुर्जर का कहना है कि गांव में बुनियादी सुविधाएं नहीं होने से आमजन त्रस्त है। पेयजल, गांव के विद्यालय में कक्षा कक्षों का निर्माण, गांव के कच्चे रास्तों में नाली सहित सीसी रोड निर्माण आदि कार्य नहीं होने से आमजन त्रस्त हैं। लोगों को काफी परेशानी से जूझना पड़ रहा है। विधायक ने अपने फंड से कुछ काम कराए लेकिन उम्मीद के अनुरूप काम इसलिए नहीं हुए कि वो विपक्ष में है।
ये बोले विधायक
विधायक घनश्याम महर के अनुसार विपक्ष में रहते हुए ग्राम पंचायत मेढेकापुरा में अपने कोष से समान रूप से विकास के लिए राशि दी है।
ग्राम पंचायत में विभिन्न विकास कार्यों के लिए करीब ४८ लाख रुपए की राशि दी गई। ढण्डकापुरा में सडक़ के काम को प्राथमिकता से कराएंगे।



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