कोटा. शहर से बाहर यात्रा करनी है तो समय ज्यादा लेकर निकलें। बस कहां, कब दगा दे दे और उसे ठीक होने तक इंतजार करना पड़े। हो सकता है बस ही बदलनी पड़ जाए।
उबडख़ाबड़ और खस्ताहाल सड़कों बसों के ब्रेक डाउन हो रहे हैं। इसका खामियाजा न सिर्फ यात्रियों को उठाना पड़ रहा है,बल्कि बस संचालकों और रोडवेज व निजी बसचालक व संचालकों को भी उठाना पड़ रहा है। राजस्थान राज्य पथ परिवहन विभाग के अनुसार हर माह 15 से 16 बसों के ब्रेक डाउन हो रहे हैं। यह तो सिर्फ जिन चालकों ने बसों को ठीक करवाने के बिल दिए वह हैं, इनके अलावा जो अभी बिल नीं आए है वह अलग हैं।
इन रास्तों की हालत खस्ता
विभाग व निजी बसों के चालकों के अनुसार जानकारी के अनुसार कोटा से सिंगोली तक करीब 80 किलोमीटर, कोटा से झालावाड़ रोड टुकड़े टुकड़े में करीब 40 किलोमीटर और नैनवा रोड 100 किलोमीटर का हिस्सा खस्ता हाल में हैं। कोटा- सांगोद रोड की स्थिति भी ऐाी ही है। इनमें जगह जगह गहरे सड़के उखड़ी हुई है और गहरे गड्ढे हो रहे हैं। कोटा ट्रेवल्स ऐसासिएशन के अध्यक्ष सुनील शर्मा बताते हैं कि बारां, रावतभाटा रोड से गुजरना मुश्किल हो रहा है।
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यह हो रहे हैं नुकसान
सड़कों के खस्ताहाल होने से टायर भस्ट हो रहे हैं। टायर में गिट्टी लगते ही वह भस्ट हो जाता है। इसके अलावा बसों की कमानियां भी खराब हो रही है। छोटी मोटी खराबी आ जाती है तो जैसे चालक जैसे तैसे ले आते हैं, ज्यादा खराबी होने पर गाड़ी को खड़ी करनी पड़ती है। डीजल भी ज्यादा लगता है। खराब सड़कों पर 20 से 25पाइंट अतिरिक्त पेट्रोल ज्यादा जलता है। इकलेरा से कोटा आए विकास बताते हैं कि कोटा आने में अमूनन ढाई घंटे का समय लगता है, लेकिन उन्हें साढ़े चार घंटे लगे हैं। अन्य यात्रियों ने भी इसी तरह की समस्या बताई।
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रुट पर बसों के संचालन से पहले स्टाफ बस को चैक करता ही है, फिर भी बरसात में रोड खराब होने से टायर खराब होने की शिकायतें आती है। गत दिनों में भी 15 से 16 बसों के खराब होने की शिकायत आई है। -गौरव कुमावत, प्रबंधक संचालक, रोडवेज





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