अलवर. शहर में बढ़ते अपराधों के चलते आमजन व महिलाओं में भय बना हुआ है। शहर में हालात यह हो गए हैं कि अब लूट व चोरी की घटनाओं को देखते हुए महिलाओं ने गहने पहनना ही छोड़ दिया है। न तो महिलाओं के गले में सोने के मंगलसूत्र दिखाई देते हैं और न ही महंगे पर्स या फिर मोबाइल। स्थिति यह है कि महिलाएं ना तो घरों में सुरक्षित है ओर न ही बाहर सडक़ों पर। अपराध की घटनाओं से न सिर्फ लोगों में असुरक्षा की भावना आई है बल्कि पुलिस के प्रति विश्वास भी कम हुआ है। जब शहर में घर में बैठे व्यापारी का अपहरण व लूट हो सकती है तो महिलाएं कैसे अपराधियों से बच सकती है। कभी भी कहीं भी कोई हादसा हो सकता है।
आज महिलाएं घर से निकल तो रही है लेकिन उनके और परिजनों के मन में तब तक डर रहता है जब तक घर सुरक्षित न पहुंच जाए। महंगाई इतनी है कि एक व्यक्ति की कमाई से घर नहीं चल सकता । इसलिए महिलाओं को घर से निकलना ही पड़ता है।
पारूल वेदी, विजय नगर
आए दिन अखबारों में महिलाओं की चेन लूट की घटनाएं छपती है। इनको पढऩे के बाद से मन में इतना डर बैठ गया है कि मैंने तो सोने की चेन पहनना ही छोड़ दिया है। जब कहीं बाहर जाना होता है तो आर्टिफिशल ज्वैलरी ही पहनती हूं।
सीमा शर्मा, बसंत बिहार
अलवर में खूले आम अपराध होने लगे हेँ। अनहोनी घटनाएं महिला और पुरुष किसी के साथ भी हो सकती है। लेकिन ऐसे में यदि पुलिस मदद नहीं करें तो हमें डर और भी ज्यादा लगता है। पुलिस पीडि़त को परेशान अधिक करती है। इसलिए अपने आपको सतर्क रखने की जरुरत है।
शीलू बंसल, विकास पथ
अलवर अपराध का गढ़ बनता जा रहा है । आए दिन युवतियों से पर्स छिनने और राहगीरों से मोबाइल छिनने की घटनाएं सुनने को मिल रही है। ऐसे में हर किसी के मन में असुरक्षा की भावना पैदा होना स्वाभाविक है। महिलाओं की सुरक्षा के दावे खोखले होते हैं।
नीत पटेल, गोपाल टाकीज
केंद्र सरकार हो या फिर राज्य सरकार हर बार महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर तारीफों के पुल बांधती हैं। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर ही है। महिलाएं कही भी सुरक्षित नहीं है। बड़ी बुजूर्ग महिलाओं से लेकर छोटी बालिकाओं तक के साथ दुराचार हो रहे हैं।
पार्वती शर्मा, गोपाल टाकीज
आज अपराधियों के हौंसले इतने बुलंद हो गए हैं कि घर बैठे व्यक्ति के साथ अपराध हो रहा है। ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठना गंभीर चिंता का विषय है। यदि किसी बुजूर्ग महिला के साथ चैन छिनने की घटना होती है तो केवल चीख सकती है। इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकती।
कृष्णा जैमिनी, भीकम सैयद
पहले शादियों में दिखावा करने के चलते महिलाएं ज्यादा से ज्यादा सोने के गहने पहनती थी, लेकिन आज गहने बनवाती तो हैं लेकिन शादियों में नहीं पहनती है। क्योंकि चोरी होने का डर हर समय सताता रहता है। मोबाइल पर बात करते हुए चलना कभी भी हादसे को न्यौता दे सकता है। नीशा गुर्जर, जोहडा पटेल





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