नाथद्वारा. विधानसभा चुनाव को देखते हुए नाथद्वारा विधानसभा से भाजपा में उम्मीदवारी के लिए कई नेता दौड़ में हैं। इनमें स्थानीय के साथ ही कई बाहरी उम्मीदवारों के भी नाथद्वारा में नजर आने के चलते मंगलवार को कुछ स्थानीय नेताओंं की ओर से समन्यव को लेकर बैठक हुई।
शहर के इमली नीचे स्थित पालीवाल समाज की हवेली में बुलाई गई बैठक में अधिकांश नेताओं व जमीन से जुड़े कार्यकताओं ने सत्ता होने के बावजूद उन पर बीते वृतांत का बखान किया। वहीं, कई वक्ताओं ने खुले रूप में कहा कि विधानसभा के निवासी को छोडक़र कोई भी बाहरी उम्मीदवार होगा तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। गोविंदकांत त्रिपाठी, नवलसिंह सुराणा, वीरेन्द्र पुरोहित, भीमसिंह चौहान आदि पार्टीजनों के द्वारा पार्टी में समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से बुलाई गई बैठक को जिलाध्यक्ष भंवरलाल शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी जो दिशा-निर्देश देती है उसका सभी को सम्मान करना चाहिए। उन्होंने नाथद्वारा सीट को चुनौती मानते हुए कहा कि जो भी पार्टी का चुनाव चिन्ह लेकर आएगा उसके साथ सभी कार्यकर्ता लगेंगे।
उधर पार्टी में चल रहे आपसी मनमुटाव एवं विभिन्न गुटों को लेकर भी वक्ताओं ने संबोधित करते हुए विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार को लेकर पार्टी के आला नेताओं की ओर इशारा करते हुए चेताया कि नाथद्वारा को चरागाह समझकर पार्टी उम्मीदवार पैराशूट से नहीं उतारें, उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि ऐसा हुआ तो पार्टी को परिणाम के लिये भी पहले से सोच लेना चाहिए। त्रिपाठी ने खुले शब्दों में कहा कि उम्मीदवार कोई भी हो, वो विधानसभा क्षेत्र का होना चाहिए। इस दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष रामचंद्र बागोरा, रेलमगरा मंडल अध्यक्ष बोथलाल जाट, कोठारिया अध्यक्ष हरदयाल सिंह चौहान, देलवाड़ा अध्यक्ष संजयसिंह बारहठ, खमनोर के नवनीत पालीवाल, बूथ विस्तारक प्रभारी गणेश व्यास, भानु पालीवाल, नवनीत, हजारीलाल गुर्जर, बाबूलाल जोशी, शंकर टेलर, राजेन्द्र श्रीमाली, गोपाल पुरोहित मौजूद थे। संचालन संजय मांडोत ने किया।
आरोप प्रत्यारोप भी
बैठक के दौरान पार्टी की गतिविधियों को लेकर तो कार्यकर्ताओं आदि ने अपने मन से व्यथा का बयान किया। वहीं, इस दौरान शहर के नेताओं में भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। एक जनप्रतिनिधि ने कहा कि पार्टी संगठन आदि के द्वारा अलग नीति चलाई जाती है और जनप्रतिनिधियों को अनदेखा किया जाता है किसी की टांग खिंचाई कैसे की जाती है,वहीं यह भी कहा कि बाहर से आकर भी पार्टी का चुनाव लड़ा और जीतकर यहां से गए ,फिर भीआपने क्या कर लिया , आदि से अपने को पार्टी में साबित करने का प्रयास किया। इस पर पार्टी संगठन के पदाधिकारी ने भी उसका प्रति उत्तर देते हुए जनप्रतिनिधि का नाम लिये बिना कसर निकालने में कोई कमी नहीं रखी और कहा कि जनप्रतिनिधि बनने वाले अपने आपको पार्टी से बड़ा नहीं समझे संगठन से ही जनप्रतिनिधि बने हैं। भाषण तो सब दे सकते हैं पर जनप्रतिनिधि भी अपने दायित्वों को समझते हुए संगठन के कार्यकर्ताओं की ओर ध्यान दें। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने तो सत्ता होने के बावजूद कार्यकर्ताओं की समय समय पर सुध नहीं लेकर चुनाव आदि के समय याद करने की भी बात कही । जिस पर कई बार समर्थन में कार्यकर्ताओं ने खूब तालियां बजाई। वहीं एक कार्यकर्ता ने अपने बिजली के बिल आने को लेकर आई समस्या का दुखड़ा भी सुनाया,वहीं यह भी कहा कि सत्ता होने के बावजूद जो जनप्रतिनिधि कार्यकर्ता के कार्य नहीं करा सके वो कार्यकर्ता कितना दुखी होता है उसका ही मन जानता है। वहीं पिछले चुनाव में भी पार्टी के निर्णय को लेकर कुछ वक्ताओं ने बिना नाम लिये अपनी भड़ास भी निकाली।






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