राजसमंद @ पत्रिका. देसी-विदेशी पर्यटकों का राजसमंद में ठहराव सुनिश्चित करने, पर्यटकों को मेवाड़ के इतिहास से रूबरू करवाने के मकसद से राजसमंद की नौचौकी पाल पर महाराणा राजसिंह पैनोरमा का निर्माण हुआ, लेकिन इसकी कुछ त्रुटियां पैनोरमा के मकसद में बाधा बन रही हैं। जिला झीलों की नगरी तथा कुंभलगढ़ से जुड़ा है, यहां प्रतिवर्ष सैकड़ों विदेशी पर्यटकों का आना-जाना रहता है, पैनोरमा बनने से पर्यटक मेवाड़ का इतिहास जानने तथा इसकी भव्यता देखने यहां आ रहे हैं, लेकिन यहां मॉडल्स के पास अंकित इतिहास मात्र हिंदी भाषा में दर्ज होने से उन्हें मॉडल्स व मेवाड़ को समझने में मुश्किल हो रही है, अगर हिंदी के साथ ही इसका एक और लेख अंग्रेजी भाषा में मौजूद हो तो उन्हें भी मेवाड़ को जानने में सहजता होने लगे।
हाथ लगाने से गंदी हो रही प्रतिमाएं
पैनोरमा 5 दीर्घाओं में बना है। जिनमें महाराणा राजसिंह का जन्म, राजसिंह की धर्म यात्रा, महाराणा जगतसिंह के निधन बाद राजसिंह का राजतिलक, विवाह, टीका दौड़, अजीतसिंह की रक्षा का वचन, औरंगजेब को चुनौती, श्रीनाथजी विग्रह की सुरक्षा, चित्तौडग़ढ़ किले का जीर्णोद्धार, औरंगजेब के जजिया कर के विरोध स्वरुप पत्र, महाराणा राजसिंह, झील का अवलोकन करते राजसिंह, युद्ध में राजसिंह द्वारा औरंगजेब को शिकस्त देने, बाण (बायण) माता का मंदिर व नतमस्तक महाराणा राजसिंह व उनकी रानी सहित दो दर्जन से प्रतिमाएं 2 डी फाइबर पैनल, थ्री डी फाइबर से बनी हैं, प्रतिमाओं से एक से 5 फीट की दूरी पर पाइप लगाकर पर्यटकों वहीं से प्रतिमाओं को निहारने, फोटोग्राफी करने की इजाजत है, लेकिन कुछ पर्यटक नियमों को तोडक़र दीर्घाओं के अंदर प्रवेश कर जाते हैं और मॉडल्स को हाथों से छूते हैं, साथ खड़े होकर सेल्फी लेते हैं, ऐसे में प्रतिमाएं गंदी हो रही है, तथा फाउंडेशन टूटने का खतरा बना हुआ है।
एक माह में आए आधा दर्जन से अधिक विदेशी
राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण की ओर से नौचौकी पर निर्मित महाराणा राजसिंह पैनोरमा 11 अगस्त 2018 को पर्यटकों के लिए खोला गया। इस एक माह के अंदर यहां आधा दर्जन से ज्यादा विदेशी पर्यटक आए, उन्होंने भाषा संबंधी अपनी समस्या बताई। वह पैनोरमा की भव्यता तो देख सके लेकिन उन दृश्यों की गम्भीरता से अनजान ही चले गए।
कांच लगाने से हो सकती है सुरक्षा!
मॉडल्स पर्यटकों की पहुंच से दूर करने के लिए अगर फाउंडेशन के बाहर कांच या सफेद फाइबर की चद्दर चार-चार फीट लगा दी जाए तो मूर्तियां और फाउंडेशन पर्यटकों की पहुंच से दूर हो जाए तथा पैनोरमा की सुंदरता और भव्यता भी बनी रहेगी।
त्रुटियों में सुधार किया जाएगा...
पैनोरमा निर्माण में बारीकी से काम किया गया है, फिरभी कुछ त्रुटियां रह गई हैं, इन्हे शीघ्र ही दूर करवाया जाएगा।
औंकारसिंह लखावत, अध्यक्ष, राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण, जयपुर





No comments:
Post a Comment