लाडनूं.
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सांसद मदनलाल सैनी ने कहा कि भारतीय संस्कृति अनेक विशेषताओं वाली संस्कृति है। यहां सामाजिक दायित्वों के बारे में व्यक्ति जिम्मेदार होता है। उस व्यक्ति के लिए समाज खड़ा हो जाता है। केवल अपनी ही सोचने वालों के बारे में समाज भी नहीं सोचा करता है। मंदिर में झुकने पर उस व्यक्ति का अहं खत्म हो जाता है। वे सोमवार को जैविभा (मान्य विश्वविद्यालय) की महादेवलाल सरावगी अनेकांत शोधपीठ के तत्वावधान में आचार्य तुलसी श्रुत संवद्र्धिनी व्याख्यानमाला के तहत हुए व्याख्यान कार्यक्रम को बतौर अतिथि संबोधित कर रहे थे। महाप्रज्ञ महाश्रमण ऑडिटोरियम में भारतीय संस्कृति का भविष्य विषयक व्याख्यान में उन्होंने कहा कि आज देश को तोडऩे वाली शक्तियां सक्रिय हैं। आतंकवाद को पैसा और पनाह देने वालों से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने नौजवानों से आह्वान किया कि वे ही इस देश को बदल सकते हैं। सैनी ने गाय के विनाश पर भी चिंता जताते हुए कहा कि जैन समाज ने गोरक्षा का संकल्प लेकर बड़ा काम हाथ में लिया है। जो सराहनीय है। उन्होंने आचार्य तुलसी प्रणीत अणुव्रतों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके द्वारा दिखाई गई दिशा को अगर थोड़ा सा भी ग्रहण किया जावे तो जीवन में बदलाव लाया जा सकता है। मुनिश्री जयकुमार के सान्निध्य में हुए इस व्याख्यान कार्यक्रम में व्याख्यानकर्ता आरएसएस के उत्तर क्षेत्र संघचालक डा. बजरंगलाल गुप्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति से ही यह देश सुरक्षित है। भारत का प्राण तत्व इसकी संस्कृति ही है। उन्होंने कहा कि समाज की मुख्य समस्या है कि संवेदना लुप्त होती जा रही है। इस पर ध्यान देना आवश्यक है। डा. गुप्ता ने हम प्रकृति का शोषण नहीं बल्कि दोहन करते हैं। लेकिन इसमें देने व लेने का क्रम नहीं टूटने देते।
संस्कृति पुरातन है
मुनि जयकुमार ने कहा कि हमारी संस्कृति अतीत, वर्तमान व अनागत तीनों को समाहित रखती है। यह संस्कृति कभी समाप्त नहीं हो सकती। इसमें परिवर्तन, परिवद्र्धन व परिशोधन की संभावना हमेशा रहती है। जहां अनाग्रह पूर्वक परिवर्तन की प्रक्रिया चलती है उसे कोई नष्ट नहीं कर सकता है। कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि भारतीय संस्कृति का आधार धर्म है। धर्म शाश्वत है इसलिए भारतीय संस्कृति भी शाश्वत है। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने व्याख्यानमाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में जैन विश्व भारती के मुख्य ट्रस्टी भागचंद बरडिय़ा व जीवनमल मालू विशिष्ट अतिथि थे। इस मौके पर प्रभारी डा.योगेशकुमार जैन, रजिस्ट्रार विनोदकुमार कक्कड़, उप कुलसचिव डा. प्रद्युम्नसिंह शेखावत, शोध निदेशक प्रो.अनिल धर, प्रो.दामोदर शास्त्री, प्रो. बीएल जैन, डा.जुगल किशोर दाधीच, डा. गोविंद सारस्वत, डा. बिजेंद्र प्रधान, हरीश शर्मा, अशोक सुराणा व सागरमल नाहटा आदि थे।





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