जयपुर. जस्टिस लोढ़ा समिति की सिफारिशों के अनुसार राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) के संविधान में संशोधन के लिए बुलाई गई एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग(ईजीएम) में सीपी जोशी और ललित मोदी गुट के जिला सचिवों में मतभेद बरकरार रहे। जिला संघ सिर्फ अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी, सचिव राजेन्द्र सिंह नांदू और कोषाध्याक्ष पिंकेश पोरवाल को संविधान संशोधन के लिए अधिकृत करने पर राजी हुए। इन तीनों पदाधिकारियों के हस्ताक्षर के बाद ही संविधान संशोधन पर मोहर लगेगी।
स्थगित भी हुई बैठक
आरसीए एकेडमी पर मतभेद के चलते आरसीए अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी की अध्यक्षता में हुई बैठक को दो घंटे लिए स्थगित भी करना पड़ा था। बैठक में तीन जिला सचिवों ने संविधान में संशोधन के सुझाव पेश किए। पूर्व सचिव सोमेन्द्र तिवारी (मोदी गुट), संयुक्त सचिव महेन्द्र नाहर (जोशी गुट) और जयपुर जिला संघ के सचिव डॉ. बिमल सोनी ने अपने सुझावों का ड्राफ्ट पेश किया तो एक बार विवाद की स्थिति पैदा हो गई और बैठक को दो घंटे के लिए स्थगित करना पड़ा। बाद में सभी सदस्यों के सुझावों के अनुरूप और खेल कानून के प्रावधानों को नियमानुसार शामिल करते हुए संविधान में संशोधन का ड्राफ्ट पेश किया गया और आरसीए अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्याक्ष को संविधान संशोधन के लिए अधिकृत भी किया गया।
20 तक करना होगा संशोधन
बीसीसीआई के नए संविधान के अनुसार सभी राज्य संघों को 20 सितम्बर तक अपने संविधान में संशोधन करना है। संविधान संशोधन के मुख्य प्रावधानों में तीन साल में चुनाव और सीईओ की नियुक्ति करना शामिल है।
रजिस्ट्रार की कार्यवाही रोकी जाए
इस बीच सहकारिता रजिस्ट्रार के पास चले रहे राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के मामले में घटनाक्रम तेजी से घूमा। आरसीए ने नोटिस की मियाद पूरी होने से ऐन पहले शाम को सहकारिता रजिस्ट्रार को जवाब पेश कर दिया, वहीं हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश कर तदर्थ समिति बनाने का अंदेशा जताते हुए सहकारिता रजिस्ट्रार की कार्यवाही रोकने का आग्रह किया है। आरसीए के संयुक्त सचिव ने हाईकोर्ट में मेंशन कर सहकारिता रजिस्ट्रार की कार्यवाही से भी अवगत कराया।
आरसीए, उसके अध्यक्ष जोशी व संयुक्त सचिव महेन्द्र नाहर की ओर से हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश कर सहकारिता रजिस्ट्रार पर शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। इसमें कहा है कि क्रीड़ा परिषद ने पूरे रिकॉर्ड सहित आरसीए का कार्यालय सीज कर दिया है। प्रार्थना पत्र में सहकारिता रजिस्ट्रार को पेश जवाब का हवाला दिया गया है। हाईकोर्ट में पेश प्रार्थना पत्र में गुहार की है कि 2014 से अब तक लेखों के अंकेक्षण के लिए स्वतंत्र अंकेक्षक नियुक्त किया जाए। तदर्थ कमेटी बनाकर निर्वाचित कार्यकारिणी को हटाने का प्रयास हो रहा है। सहकारिता रजिस्ट्रार की जांच कार्यवाही को रोका जाए।





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