अश्वनी प्रतापसिंह @ राजसमंद. कुंभलगढ़ अभयारण्य के वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सात साल पूर्व इसे राष्ट्रीय अभयारण्य घोषित करते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी से आजतक अंतिम अधिसूचना जारी नहीं होने से मामला अधर में लटका है। बताया जाता है कि अभी धार्मिक स्थलों की आपत्ति के दावों का निस्तारण नहीं हो पाया है।
वन्य प्राणियों के संरक्षण, वृद्धि एवं उनके विकास तथा पर्यावरण को संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से राज्यसरकार ने नवम्बर २०११ को वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम १९७२ की शक्तियों का उपयोग करते हुए पाली, उदयपुर व राजसमंद जिले की वनभूमि को मिलाकर राष्ट्रीय अभयारण्य (नेशलन पार्क) घोषित करने का नोटिफिकेशन जारी किया, इसके बाद इस भूमि में काबिज लोगों से दावे मांगे गए। जिसमें तीनों जिले से 319 दावे भूमि के तथा 37 धार्मिक स्थलों के आए। सात सालों में जिम्मेदार महज भूमि के दावे ही निस्तारित कर पाए, जिससे राष्ट्रीय उद्यान के काम को गति नहीं मिल पाई।
यह निस्तारित हुए दावे
जिला दावे
उदयुपर 269
राजसमंद 85
पाली 65
कुल 419
इन दावों में फंसा है पेंच
उद्यान के अंदर आने वाली तीनों जिले की सीमाओं में 37 धार्मिक स्थल आ रहे हैं। ऐसे में इन धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं द्वारा रोजाना पूजन आदि के लिए आना-जाना होता है। तीज-त्यौहारों को प्रवेश के साथ धार्मिक आयोजन भी होते हैं। श्रद्धालुओं द्वारा प्रवेश व आयोजनों आदि के लिए अधिकार मांगते हुए दावे पेश किए गए हैं, दावे में श्रद्धालुओं ने बताया है कि वह राजा-महाराजा के समय से इन मंदिरों में आते रहे हैं, ऐसे में उनका यहां आना-जाना अधिकार बनता है। इन दावों के निस्तारण को लेकर ही मामला अटका हुआ है। क्योंकि विभाग का मानना है कि अगर लोग आएंगे तो वन्यजीवों की शांति में खलल की संभावना है।
जरगाजी मार्ग के लिए पेश किया दावा
राजसमंद क्षेत्र के अंतर्गत जरगाजी नामक धार्मिक स्थल है। मेघवाल समाज वर्षों से यहां एक मेला लगाता है, मेले के लिए यहां धार्मिक यात्रा निकाली जाती है, यात्रा गांव ढालोप तहसील देसूरी जिला पाली से निकलती है। यात्रा सादड़ी कस्बे से होती हुई गांव मालगढ़ एवं काम्बा होते हुए जरगाजी पहुंचती है। यह स्थान उद्यान से बाहर हैं लेकिन सादड़ी से जरगाजी जाने के लिए अभयारण्य क्षेत्र से होकर जाना पड़ता है। ऐसे में इस मार्ग से आवाजाही रखने के लिए श्रद्धालुुओं द्वारा दावा पेश किया गया है।
वाइल्ड लाइव बोर्ड देगा अनुमति
पाली जिले के २६, राजसमंद के १० तथा उदयपुुर का १ धार्मिक स्थल इन दावों में आ रहा है। दावों के निस्तारण का अंतिम फैसला वाइल्ड लाइव बोर्ड द्वारा किया जाना है। विभाग ने बैठक की प्रक्रिया पूरीकर इसे बोर्ड के पास भेजा है।
इतनी है राष्ट्रीय अभयारण्य की सीमा
कुभलगढ राष्ट्रीय उद्यान के नोटिफिकेशन के तहत उत्तरी सीमा करमाल चौराहे से कामलीघाट चौराहे तक जाने वाली पक्की सडक़ के दक्षिण में वन खंड भगोडा के दक्षिण भाग को शामिल करती हुई इसी वनखंड की पूर्वी सीमा जो जिला पाली एवं राजसमंद को भी सीमांकित करती हुई ग्राम पंचायत बाघाना की सीमा तक रहेगी। पूर्वी सीमा ग्राम बाघाना से शुरू होकर वनखंड छापली, वनखंड दिवेर, उमरवास, सेवंत्री आदि की आरक्षित भूमि को जोड़ते हुए मामा देव की पूर्वी सीमा तक रहेगी। वहीं उद्यान की दक्षिण सीमा वनखंड मामा देव से शुरू होकर बूझ, कोरवा, पांच बोर तक रहेगी। जबकि पश्चिमी सीमा ग्राम कोरवा के पास से वनखंड मामा देव की बूझ आरक्षित वन की मश्चिम सीमा से होते हुए वनखंड बोखाड़ा (रक्षित वन) की पश्चिमी सीमा, वनखंड मजावाड़ा (आरक्षित वन) की पश्चिमी सीमा, वनखंड लाटाडा (आरक्षित वन) की दक्षिणी एवं पश्चिमी सीमा से होते हुए वनखंड कोट (आरक्षित वन) की पश्चिमी सीमा, वनखंड जोजावर (आरक्षित वन) की पश्चिमी सीमा, वनखंड भगोड़ा (आरक्षित वन) की पश्चिमी सीमा ग्राम गुडागाग तक रहेगी।
निस्तारण के बाद जारी होगी अंतिम अधिसूचना...
भूमि के दावों का निस्तारण किया जा चुका है, धार्मिक स्थलों का निस्तारण होना बाकी है। जैसे ही धार्मिक स्थलों का निस्तारण हो जाएगा, वैसे ही सरकार द्वारा अंतिम अधिसूचना जारी कर इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया जाएगा।
-फतेहसिंह राठौड़, डीएफओ, वन्यजीव राजसमंद





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