रुपया गोल होता है और ये चक्करधिन्नी भी बना देता है। सरकार का दावा है कि अच्छे दिन आ गए हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो हम अच्छे दिनों में जी रहे हैं। दो साल होने को हैं जब रात आठ बजे हमें यकायक पता चला कि 500 और 1000 के नोट बंद हो गए हैं। ये दीगर बात है कि अधिकांश घरों में नकदी शायद ही इतनी हो कि उन्हें इससे 'सदमाÓ लगता। लेकिन फिर भी बैंकों के बाहर रेकॉर्डतोड़ लाइनें लग गईं। जाने कितना कैश था देश में लोगों के पास। खैर उस समय कालेधन, आतंकवाद और भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहिम का नारा दिया गया था। अब हाल में सरकार ने डेटा जारी किए हैं उस चलन में रहे 99.3 फीसदी नोट वापस बैंकों में आ गए। धड़ाम हो गए सारे दावे। कालाधन कहां था। हम सभी तो सफेद के साथ थे। फिर नोटबंदी क्यों और किसके लिए हुई थी?
रुपया शुक्रवार को पहली बार अमरीकी डॉलर के मुकाबले रुपए के ऐतिहासिक गिरावट पर पहुंच गया। अर्थशास्त्री कहते हैं कि अमरीकी डॉलर और तेल निर्यातकों के कारण ऐसा हो रहा है। उधर, सरकार ने भी किरकिरी होती देख चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के आंकड़े जारी कर दिए, विकास दर 8.2 फीसदी हो गई। यानी दिल पर मत लो रुपया यदि धड़ाम हो रहा है तो धबराने की कोई बात नहीं है। एक और आंकड़े जारी होते हैं महंगाई सूचकांक जिन्हें हम कहते हैं। लेकिन बड़ा सवाल है कि क्या ये आंकड़े आम आदमी को समझ में आते हैं या फिर कितना आते हैं। चीजों के बढ़ते दाम जिसे आम आदमी महंगाई कहता है उसी की मार इतनी होती है कि आप 500 का नोट लेकर बाजार में जाएं और जेब में रखने लायक सामान मिलता है। अब बात चल रही है कि पेट्रोल और डीजल के दाम बेकाबू हो रहे हैं। जबकि विरोधाभास ये है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव पैंदे में हैं। आम आदमी को इसका फायदा क्यों नहीं मिल पता है?
कुल मिलाकर पुरानी कहावत है कि कोई कितना भी बड़ा अर्थशास्त्री क्यों न हो आखिरकार वह अंत में राजनेता ही बन जाता है। हमारे लिए यही मूलमंत्र के रूप में रह जाता है। देश में विकास दर बढ़ रही है, अच्छे दिन चल रहे हैं। रुपया धड़ाम हो तो हो, आप तो सरकारी दावों को समझने की उधेड़बुन में लगे रहो। लगे हाथ एडम स्मिथ और रिकार्डो की थ्योरी भी समझ लेते हैं। उलझ गए न, ये दोनों अर्थशास्त्र के ज्ञात थे, जिन्होंने ये जीडीपी, ग्रोथ रेट और फिस्कल डेफिसिट जैसे शब्दों का चलन किया था। आपकी जेब को भरी-भरी रहने के लिए इनकी शायद ज्यादा जरूरत है।





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