बालोतरा/बाड़मेड. शहर व क्षेत्र के लिए बहुप्रतीक्षित पोकरण-फलसूण्ड- बालोतरा- सिवाना नहरी पेयजल योजना का पानी पहली बार बालोतरा पहुंचा। इस पर शहर में खुशी की लहर छा गई। इसकी जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में लोग लूनी नदी पहुंचे। एक-दूसरे का मुंह मीठा करवाकर बधाई दी। चार दिन बार शहर में परियोजना के पानी की आपूर्ति किए जाने की उम्मीद है।
बालोतरा, सिवाना व क्षेत्र के सैकड़ों गांवों में नहरी मीठा पानी की आपूर्ति करने को लेकर वर्ष 2005 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने पोकरण-फलसूण्ड-बालोतरा- सिवाना नहरी पेयजल योजना स्वीकृत की थी। लम्बे समय तक योजना अधरझूल में रही जिसके बाद 2013 में कार्य आरम्भ हुआ। लगभग साढ़े चार साल के बाद आखिरकार बुधवार को नहरी पानी बालोतरा पहुंचा।
चार दिन बाद होगी जलापूर्ति
परियोजना का मीठा पानी बालोतरा पहुंचने के बाद परियोजना अधिकारी सिवाना की ओर सात-आठ पाइप जोड़ इसमें पानी छोड़ेंगे। इसके बाद इसे खुले स्थान पर बहाएंगे। पेयजल लाइन पूरी तरह से साफ होने पर संभवत: चार दिन बाद शहर बालोतरा में मीठे पानी की आपूर्ति होगी।
धूमधाम से किया गणपति विसर्जन
वहीं शहर में गणपति प्रतिमाओं का सामूहिक रूप से गाजे-बाजे से विसर्जन किया गया। शोभायात्रा के रूप में निकली विसर्जन यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। गणपति बाप्पा मोरिया अगले बरस तूं जल्दी आना के जयकारे लगाते हुए लोगा रिद्धि-सिद्धि दाता को विदाई दी। श्रद्धालुओं के खुशी में गुलाल उड़ाने से सड़कें लाल रंग से सरोबार हो गई। सनातन धर्म सभा समिति, विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में गुरुवार को शहर में गणपति प्रतिमाओं के विसर्जन का सामूहिक आयोजन हुआ। विहिप प्रवक्ता दौलत आर प्रजापत ने बताया कि दोपहर एक बजे हनवंत भवन से विराजित भगवान गणेश की प्रतिमा को लेकर श्रद्धालु शोभायात्रा के रूप में रवाना हुए। बीच मार्ग शहर भर से पहुंची गणपति प्रतिमाएं शामिल हुई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में शामिल श्रद्धालु गणपति महाराज के जयकारे लगाते, डीजे भजनों पर नृत्य करते व गुलाल उड़ाते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में युवतियां व महिलाएं भी शामिल हुई। शोभायात्रा के पुराना बस स्टैंड, शास्त्री सर्कल, गौर का चौक, क्षत्रियों का मोर्चा से गुजरने पर इसे निहारने बड़ी संख्या में लोग उमड़े। उन्होंने पुष्प वर्षा की। दर्शन-पूजन कर व प्रसाद चढ़ा परिवार में खुशहाली की कामना की। विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों की ओर से बीच मार्ग शीतल जल, पेय पदार्थों की व्यवस्था की गई। शाम पांच बजे बाद लूनी नदी में विधि-विधान से गणपति प्रतिमाओं को विसर्जित किया गया।





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