भीलवाड़ा ।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे शनिवार को जिले में गौरव यात्रा लेकर आ रही है। इससे पूर्व मांडलगढ़ उपचुनाव के दौरान जिले में सात बार आई और साथ ही सुराज संकल्प यात्रा भी लाई, उसमें जो वायदें किए थे उनमें कुछ पूरे हुए है तो कई बाकी है। साथ ही कई एेसी समस्याएं है जो जनता पूरा करना चाहती है। सरकार से कई बार मांग भी की है लेकिन उनका समाधान नहीं हुआ। चम्बल पेयजल का पानी, शिक्षा, चिकित्सा, राजस्व, नगर परिषद, यूआईटी, कृषि उपज मंडी, जेल आदि विभागों के कई बड़े मुद्दे लंबित है। टेक्सटाइल क्षेत्र घोषणाओं में उलझा हुआ है। सीएम शनिवार को आ रही है, एेसे में जिले के बाशिन्दों को उम्मीद है कि राजे पुरानी घोषणाओं के साथ नई मांगों पर जल्द अमल की घोषणा करें ताकि आचार संहिता लगने से पहले उनकी क्रियांवति हो सके।
यह बड़े प्रोजेक्ट, जो दे रहे झटके
शहर के अधिकांश हिस्सों में चम्बल परियोजना का पानी आ चुका है, जबकि ५० से अधिक निजी कॉलोनी अभी भी चम्बल के पानी से दूर है, दूसरी तरफ जिले के अधिकांश हिस्सों में पाइप लाइन पहुंचने के बावजूद पानी नहीं पहुंचा है। पेयजल के विकट हालात के बावजूद चम्बल परियोजना का पानी अजमेर जिले में ले जाने के शासकीय प्रयास हो रहे है जोकि जिले के लिहाजे से ठीक नहीं है। हरणी महादेव मंदिर से स्मृति वन होते हुए चामुंडा माता मंदिर तक रोपवे बनना है। दो साल पहले का प्रोजेक्ट है। डीपीआर सबमिट हो चुकी है। करीब छह करोड़ १० लाख रुपए खर्च होने हैं। यूआईटी व मंदिर मंडल ट्रस्ट ने सहमति दे दी लेकिन बाकी काम अधूरा है। आजाद चौक बेसमेंट पार्र्किंग बननी है लेकिन कुछ नहीं हुआ। आर्ट गैलेरी की फाइल भी आगे नहीं बढ़ पाई। चित्रकूटधाम डबल बेसमेंट पार्र्किंग में भी काम आगे नहीं बढ़ा।
शहर में बिजली आपूर्ति एवं मीटरिंग एवं बिलिंग व्यवस्था निजी कम्पनी सिक्योर संभाल रही है। जनता को शिकायत है कि चार माह में बिजली के बिल दुगने हो गए, मीटर दौड़ रहे है और बेवजह मीटर बदलें जा रहे है। भाजपा व आप के साथ ही अजमेर डिस्कॉम के तकनीकी कर्मी सरकार की व्यवस्था के खिलाफ है।- गुलाबपुरा के हुरड़ा क्षेत्र में मेमू रेल कोच कारखाना का अटका प्लांट पर जल्द कार्य हो। मांडलगढ़, गंगापुर व बदनोर क्षेत्र में नए खनन क्षेत्र विकसित हो और राजस्थान रिसर्जेट पर हुए एमओयू पर कार्य हो।
टेक्सटाइल क्षेत्र में तीन बड़ी समस्या है।
इसमें प्रमुख रूप से अन्य राज्यों के मुकाबले राजस्थान में बिजली सबसे मंहगी है। नए उद्योगों के लिए जमीन नहीं है। भीलवाड़ा में भूजल बढऩे के बाद भी डॉर्क जोन में है। इनका समाधान नहीं हुआ तो उद्योग बन्द हो जाएंगे।- रीको व जिला उद्योग केन्द्र के नियमों में काफी अन्तर है। नियम एक नहीं होने से उद्योग चलाना मुश्किल हो है। रीको व जिला उद्योग केन्द्र में जमीन आंवटन के नियम एक होने चाहिए। उद्यमी अपना उत्पाद बदलना चाहे तो नहीं बदल सकता है। जमीन बेच नहीं सकता। रीको में इसका प्रावधान है, लेकिन जिला उद्योग केन्द्र में नहीं है। रिप्स में संशोघन करने का जरूरत है। रिप्स के बाद टेक्सटाइल में उछाल आया है। लेकिन जीएसटी के बाद टेक्सटाईल उद्योग में ठहराव आ गया। रिप्स में संशोधन नहीं हुआ तो हालात विकट होंगे।- बिजली में मिले अनुदान। गुजरात व महाराष्ट्र में टेक्सटाइल के लिए बिजली की दरों में छूट है। राजस्थान में उद्योगों को डेढ़ रुपए प्रति यूनिट की छूट नही मिली तो उद्योग बन्द हो जाएंगे। जमीन के अभाव में सिरेमिक जोन अटका पड़ा है। कच्चा माल गुजरात जा रहा है। इसके चलते कई ग्राईडिंग इकाईया तक बन्द हो चुकी है।
उप पंजीयक द्वितीय का नहीं बना भवन
शहर में जमीनों की खरीद-फरोख्त ज्यादा होने से सरकार ने उप पंजीयक कार्यालय द्वितीय खोलने की घोषणा की। अभी तक न भवन बना और स्टाफ मिला। यहां तक की उप पंजीयक प्रथम का भी तबादला होने से पद रिक्त है। इससे शहर में बड़ी समस्या हो रही है। कृषि उपज मंडी व जेल जाए बाहरशहर में कृषि उपज मंडी के लिए पालड़ी के पास में जमीन स्वीकृत है। इसके बावजूद इसे बाहर ले जाने के लिए सरकार ने कोई प्रयास नहीं किया। इसी तरह जिला कारागृह के लिए भी बाहर जमीन स्वीकृत है। इन दोनों प्रमुख मामलों ने सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है। जहाजपुर में राजकीय महाविद्यालय खुले और आसींद में पीजी हो।





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