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सोच बदलेगी, तब ही बचेंगी बेटियां,बेटियों की मौत के मामले की हो विस्तृत जांच


करौली.कब तक बेटियों को कमजोर मानते रहोगे, जमाना बदल रहा है। अब सोच बदलनी होगी,तब ही बेटियां बच पाएंगी। करौली जिले में जन्म के बाद बेटियों की अधिक संख्या में मौत होने पर सरकार के साथ समाज के सामने भी सवाल खड़ा हुआ है। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए तथा बेटियों को बचाकर उनका हक दिलाना ही होगा। यह विचार राजस्थान पत्रिका की ओर से राजकीय बालिका महाविद्यालय में आयोजित टॉक-शो में करौली शहर की प्रमुख महिलाओं ने व्यक्त किए। राजकीय महाविद्यालय में वनस्पतिशास्त्र की सहायक आचार्य डॉ. सोनम बामनिया ने कहा कि समाज को ही सोच बदलनी होगी,तब ही लड़किया सुरक्षित रह पाएंगी। इसकी शुरुआत लोगों को अपने घर से करनी होगी। उन्होंने श्रीमहावीरजी या समूचे जिले में बेटियों के मौत के मामले में विस्तृत जांच की बात कही। सहायक आचार्य डॉ. मनीषा मीना ने कहा कि स्त्री और पुरुष दोनों को बदलना होगा, भू्रण हत्या के लिए सिर्फ महिला को दोषी नहीं माना जा सकता है। क्योंकि महिलाओं को जांच परीक्षण के लिए विवश भी किया जाता है। मॉडल स्कूल की अध्यापिका शशिकला पाराशर ने बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण पोषण देने को कहा। उन्होंने कहा कि डांग क्षेत्र के अनेक गांवों में खान-पान में तक अंतर होता है। गृहिणी सचि सिंघल ने कहा कि बेटियों को बेटों के बराबर पोषण दिया जाना चाहिए।
सरकार की योजनाओं की समीक्षा की जरूरत
राजकीय पीजी महाविद्यालय में सहायक आचार्य डॉ. लीना शर्मा ने कहा कि बेटियों के मामले में सरकार ने अनेक योजनाएं संचालित की हुई है, फिर भी बेटियों की मौत के मामले आना गम्भीर बात है। उन्होंने योजनाओं की समीक्षा की जरूरत बताई। शर्मा ने बताया कि बेटी किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है, जिससे बेटियों को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा कि बेटियों की मौत के मामले की जांच की जानी चाहिए। सहायक आचार्य डॉ. रूकमणि मीना ने कहा कि घर में महिलाओं का दबदबा रहता है। इस कारण महिला अपनी बेटी पर अधिक ध्यान दे। भेदभाव घर से ही समाप्त करना होगा। उन्होंने बेटियों से अपने हक के लिए आगे आने को कहा। संस्कृत की सहायक आचार्य प्रेमलता वाष्णेय ने बेटियों के संरक्षण से महिलाओं से आगे आने को कहा। पार्षद अर्चना सेठी, छात्रसंघ अध्यक्ष खेलंती मीना आदि ने महिलाओं के उत्थान के विषय पर विचार व्यक्त किए।
खुद को मजबूत बनाना होगा, बेटियों की मौत चिंताजनक
भारत हॉस्पीटल की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. आशा मीना ने कहा कि बेटियों को बचाने के लिए खुद को मजबूत बनना होगा, क्योंकि महिला पुरुष से अधिक ताकतवर होती। उन्होंने नवजात बेटियों को मापदण्ड़ों के अनुसार पोषण देने तथा बीमार पडऩे पर तुरंत चिकित्सक को तुरंत दिखाने की सलाह दी। बागड़ी हॉस्पीटल की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. वीणा का कहना है कि बालिका के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखना होगा, आशा सहयोगनी व एएनएम को अपनी भूमिका का जिम्मेदार निर्वहना करना होगा। उन्होंने बताया कि सरकार की योजनाओं का लाभ महिलाओं को मिल रहा है या नहीं। इसका सबको ध्यान रखना होगा।

 



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