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सेकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती को लेकर आई ये बड़ी खबर

बीकानेर. माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने द्वितीय श्रेणी शिक्षकों की भर्ती के जिन पदों के लिए आरपीएससी से अनुमोदना (अभिस्तावना) नहीं मिली। उनके लिए भी मंडल आवंटन के विकल्प मांग लिए है। बाद में निदेशालय ने आनन-फानन में बिना अभिस्तावना वाले पदों की काउंसलिंग पर रोक लगा दी।

 

प्रदेश में संस्कृत के २९९१, हिन्दी के १६४३ पदों की भर्ती के लिए तो आरपीएससी ने अभिस्तावना जारी कर दी। इन पदों के लिए तो निदेशालय द्वारा काउंसलिंग की जा रही है। शेष ४०० से ज्यादा पदों के लिए आरपीएससी ने अभिस्तावना जारी नहीं की। फिर भी निदेशालय ने मंडल आवंटन के लिए अभ्यर्थियों से विकल्प मांग लिए।

 

जब निदेशालय के ध्यान में यह गलती लाई गई तो किसी भी अभ्यर्थी को काउंसलिंग के लिए नहीं बुलाया। आरपीएससी की प्रतियोगिता परीक्षा पास होने के बाद फार्म भराया जाता है। अभ्यर्थी की योग्यता की जांच के अभिस्तावना जारी की जाती है। कई बार जांच में फार्म निरस्त भी कर दिए जाते हैं।

 

आरपीएससी की अभिस्तावना के बिना द्वितीय श्रेणी शिक्षकों के जिन अभ्यर्थियों से मंडल आवंटन के विकल्प लिए गए, उनके मंडल आवंटन पर रोक लगा दी है। जिन्हें काउंसलिंग के लिए नहीं बुलाया। इनके फार्मों की जांच के बाद आरपीएससी अभिस्तावना जारी करेगी। उसके बाद ही काउंसलिंग, नियुक्ति की कार्रवाई होगी।
नूतन बाला कपिला, संयुक्त निदेशक मा. शि. निदेशालय बीकानेर

 

 

रीट-२०१८ प्रथम लेवल की नियुक्ति कोर्ट के निर्णयाधीन
बीकानेर. रीट-२०१८ परीक्षा में चयनित प्रथम लेवल के २६ हजार पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति तथा द्वितीय वरीयता सूची जारी करने की मांग को लेकर निदेशालय के समक्ष धरने पर बैठे प्रदेश के चयनित शिक्षकों का शिष्टमंडल को गुरुवार को निदेशक से मिला। निदेशक ने उन्हें मामले की कानूनी स्थिति से अवगत करवाया कि लेवल प्रथम की नियुक्ति का प्रकरण उच्च न्यायालय में निर्णयाधीन है। जहां से नियुक्ति पर पहले से स्थगन आदेश है।

 

जब नियुक्तियां ही न्यायालय के विचाराधीन है तो द्वितीय वरीयता सूची कैसे जारी हो सकती है। निदेशक ने बताया कि मामले में तीन बार शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि बातचीत के लिए आए। उन्हें यही स्थिति बताई गई। धरनार्थियों का शिष्टमंडल भी तीन बार वार्ता कर चुका है। वार्ता के बाद राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के अध्यक्ष उपेन यादव ने बताया कि यह बात सही है कि मामला न्यायालय के निर्णायाधीन है। फिर भी निदेशालय हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र लगाकर निर्णय का आग्रह कर सकता है। अब आचार संहिता लगने वाली है। ऐसे में उनकी नियुक्ति का मामला लम्बित हो जाएगा।



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