नई दिल्ली। आज की तेजी से आगे बढ़ती दुनिया में सभी जल्द से जल्द सफल बनाना चाहते हैं। आजकल लोग जल्दी सफलता पाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार है। ये बात तो सच है की सफल बनाने के लिए कड़ी मेहनत करना बेहद ही जरूरी है। लेकिन सफल बनने के लिए कड़ी मेहनत के साथ कुछ बातों का भी ध्यान रखना बेहद जरूरी हैं। आज हम आपको रतन टाटा से लेकर बड़े-बड़े पारसी बिजनेसमैन के बारे में ऐसे कुछ सीक्रेट बताने जा रहे है। जिनके जरिए वो आज दुनिया के जाने माने सफल बिजनेसमैन हैं।
ये है देश के सफल पारसी बिजनेसमैन
रतन टाटा, आदि गोदरेज ,पालोनजी मिस्त्री, गोदरेज, देश की जानी-मानी पारसी बिजनेस फैमिली है। रतन टाटा और साइरस पूनावाला पारसी कम्युनिटी के लीडर माने जाते हैं। पारसी कम्युनिटी की खास बात यह है कि वह हमेशा से कॉरपोरेट वर्ल्ड में अपना एक बड़ा मुकाम रखती है। उनकी लीडरशिप क्वॉलिटी, सोशल कनेक्शन और सोशल वर्क दुनिया भर में फेमस है।
ये है पारसीयों की सफलता का सीक्रेट
कॉरपोरेट कल्चर में लॉयल्टी पर होता है फोकस-पारसी कारोबार अपना कॉरपोरेट कल्चर ऐसा बनाते हैं जिसमें कर्मचारी कंपनी के लिए लॉयल बने। पारसी परफॉर्म करने वाले कर्माचारियों के फाइनेंशियल इंसेंटिव का ध्यान रखते हैं, ताकि कर्मचारियों के बीच पॉजिटिव एन्वायरमेंट बने। पारसियों के काम करने का अपना अलग स्टाइल होता है। पारसी सिस्टमैटिक और डिसीप्लीन तरीके से काम करते हैं।
पारसी रखते है सब पर नजर
काम सौंपने के बाद भी मैनेजमेंट पर रखते हैं नजर-पारसी काम सौंपने के बाद अपने मैनेजमेंट पर नजर रखते हैं।पारसी कारोबारियों को यह अच्छे से पता होता है कि उन्हें कब अपने कर्मचारियों के काम में दखल देना है। पारसियों मानते हैं कि एक नाखुश एग्जीक्यूटिव को बदलने से ज्यादा आसान उसकी जगह किसी और को लाना है। पारसी कम्यूनिटी परफॉर्म नहीं करने वाले एग्जीक्यूटिव या फैमिली मेंबर को रिप्लेस कर सही काम करने वाले लाने में देर नहीं करते। रतन टाटा ने साइरस मिस्त्री के साथ ऐसा ही किया है।
ऐसे लेते है फैसला
लॉन्ग टर्म प्रॉफिट पर रहता है फोकस-पारसी बिजनेस और इन्वेस्टमेंट पर नजर रखते हैं। वह कारोबार मे शॉर्ट टर्म की जगह लॉन्ग टर्म प्रॉफिट पर अधिक फोकस करते हैं। उन्हें किस बिजनेस से कितना रिटर्न मिल रहा है, इसका ध्यान रखते हैं। पारसी कारोबारी का मेन फोकस कारोबार बढ़ाने पर होता है। वह एक्सपेंशन के पूरे प्रोसेस पर अपनी नजर बनाए रखते हैं। वह दूसरों की सोच पर फैसले नहीं लेते, बल्कि अपने फैसले खुद लेते हैं। वह इस बात पर नजर रखते हैं कि दिए गए हालात में किसने सही फैसला लिया और किसने गलत। परफॉर्म नहीं करने वाले मैनेजमेंट को ज्यादा समय नहीं देते।





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